'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट' के लिए फंड की कमी (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट' के लिए फंड की कमी, SC ने महाराष्ट्र सरकार को लताड़ा, कहा- पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य कर्तव्यबद्ध

सर्वोच्च न्यायालय ने वसई-विरार महानगरपालिका में 'सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट' के लिए निधि आवंटित करने में नाकाम रहने को लेकर शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई और कहा कि राज्य कर्तव्यबद्ध है।

आंचल लोखंडे

दिल्ली: महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन और सियासी उठापठक के बाद अब मंत्रीपद और पालकमंत्री पद भी सौपे जा चुके हैं। हर कोई अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ध्यान लगाए बैठा है। लेकिन इसी बीच कार्यपूर्ति न होने के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने आज पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार को जमकर लताड़ा।

दरअसल सर्वोच्च न्यायालय ने वसई-विरार महानगरपालिका में 'सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट' के लिए निधि आवंटित करने में नाकाम रहने को लेकर शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई और कहा कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए राज्य कर्तव्यबद्ध है।

नगर निकायों की संख्या कितनी

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुयां की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के पूर्व के इस रुख पर नाराजगी जताई कि आवश्यक परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध नहीं है। पीठ ने राज्य सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए, जिसमें यह निर्दिष्ट किया जाए कि निधि कब जारी की जाएगी और महाराष्ट्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 का अनुपालन करने वाले नगर निकायों की संख्या कितनी है।

शहरी विकास विभाग के रुख पर असंतोष

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हलफनामा 21 फरवरी तक दाखिल किया जाए। पीठ ने 15 जनवरी को मुंबई के शहरी विकास विभाग के रुख पर असंतोष जताया था, जिसमें दावा किया गया था कि उसके पास संयंत्रों के लिए धन की कमी है और न्यायालय ने प्रधान सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 24 जनवरी को पेश होकर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था। महाराष्ट्र की खबरें पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें...

नियमों का कार्यान्वयन और वायु प्रदूषण का सीधा संबंध

पीठ ने कहा, "बहुत ही अजीब रुख अपनाया गया... जो यह है कि धन की अनुपलब्धता के कारण दो परियोजनाओं को मंजूरी नहीं दी जा सकती। हम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के कार्यान्वयन पर विचार कर रहे हैं। नियमों का कार्यान्वयन न होना वायु प्रदूषण से सीधा संबंध रखता है।" शुक्रवार को पीठ ने प्रधान सचिव एच. गोविंदराज से यह बताने को कहा कि राज्य सरकार ने वैधानिक नियमों को लागू करने के लिए नगर निकाय को फंड मुहैया करने से इनकार क्यों किया गया।

सरकार कब करेगी भुगतान

पीठ ने सवाल किया, "पैसा कहां जा रहा है? क्या राज्य सरकार का यह रुख है कि आप इन दो परियोजनाओं के लिए भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं, जो 2016 के नियमों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हैं? हम इस पर विचार करेंगे कि पैसा कहां जा रहा है? हमें बताएं कि आप कब भुगतान करेंगे?" न्यायालय ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि हमें यह सब करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण का आदेश

राज्य सरकार पर्यावरण की रक्षा के लिए संवैधानिक योजना के तहत अपने दायित्वों को नहीं समझ रही। शीर्ष अदालत पुणे स्थित राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के खिलाफ वसई विरार शहर महानगरपालिका की 2023 की अपील पर सुनवाई कर रही है। नियमों के कार्यान्वयन को लेकर चरण रवींद्र भट्ट नामक व्यक्ति ने यह याचिका दायर की थी।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: एक क्लिक में पढ़ें दिनभर की सारी बड़ी खबरें

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मीडिया की नो एंट्री! फोटो-वीडियो पर भी लगा बैन, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

आचार्य प्रमोद कृष्णम का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- राहुल गांधी पाकिस्तान के राष्ट्रपति जैसे

Tamil Nadu NEET Protest: विधानसभा के नए प्रस्ताव के बावजूद चेन्नई में NEET के खिलाफ प्रदर्शन जारी

JPSC-JSSC पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का फूटा गुस्सा, हेमंत सोरेन के साथ राहुल-तेजस्वी का भी फूंका पुतला