प्रशांत किशोर और रोहित पवार  (सोर्स: सोशल मीडिया)
महाराष्ट्र

भाजपा की तो नाक कट गई... बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत पर बोले रोहित पवार; कहा- BJP की डेडलाइन आ गई है

Bankipur Election Result: बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की जीत पर NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की डेडलाइन आ गई है।

गोरक्ष पोफली

Rohit Pawar Targets BJP After Prashant Kishor Victory: भारतीय राजनीति में इन दिनों चाणक्य कहे जाने वाले प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी की चर्चा जोरों पर है। बिहार की राजनीति में हुए एक बड़े उलटफेर ने महाराष्ट्र तक हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद चंद्र पवार के विधायक रोहित पवार ने इस जीत को आधार बनाकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। रोहित पवार ने दावा किया है कि अब भाजपा की डेडलाइन नजदीक आ गई है और उनके पतन की शुरुआत हो चुकी है।

विवाद और चर्चा का मुख्य केंद्र नितिन नबीन का पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र रहा, जिसे भाजपा का अभेद्य किला माना जाता था। रोहित पवार के अनुसार, इस उपचुनाव में मतदाताओं ने जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर के उम्मीदवार को विजयी बनाकर भाजपा को करारी शिकस्त दी है। पवार ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस हार ने भाजपा की नाक काट दी है, जो यह दर्शाता है कि अब जनता का मिजाज बदल रहा है।

अपना टाइम आ गया पवार का नया नारा

रोहित पवार ने प्रशांत किशोर को उनके ही गढ़ में भाजपा को मात देने के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने अपने समर्थकों में जोश भरते हुए कहा कि पहले लोग कहते थे अपना टाइम आएगा, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है, अब अपना टाइम आ गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से धैर्य रखने की अपील करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले समय में जीत निश्चित है।

डिलिमिटेशन बिल पर संकट के बादल

रोहित पवार ने केवल एक चुनाव परिणाम पर ही बात नहीं की, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीति से भी जोड़ा। उन्होंने भविष्यवाणी की है कि इस हार के बाद अब केंद्र सरकार के लिए डिलिमिटेशन बिल को संसद में पास कराना नामुमकिन होगा। उनके अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का बढ़ता आक्रोश और बांकीपुर जैसी जगहों पर भाजपा की करारी हार यह स्पष्ट करती है कि सरकार अब बैकफुट पर है।

लोकतंत्र की जीत का दावा

रोहित पवार ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र की जीत करार दिया है। उनका मानना है कि जब सत्ताधारी दल के सबसे मजबूत किलों में हार होने लगे, तो यह संदेश साफ है कि जनता अब तानाशाही या थोपी गई नीतियों को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। प्रशांत किशोर की इस जीत ने न केवल बिहार बल्कि अन्य राज्यों के विपक्षी दलों को भी एक नई संजीवनी दी है।

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