पीएम मोदी के साथ बातचीत करते कटहल किंग मिथिलेश देसाई सोर्स: एक्स @jpsin1
रत्नागिरि

कौन हैं कटहल किंग? जिनकी PM मोदी से बातचीत हो रही वायरल, जानिए रत्नागिरी के किसान मिथिलेश देसाई की कहानी

jackfruit king Spoke With PM Modi: सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के रिसेप्शन में PM मोदी के साथ कटहल किंग की मुलाकात सुर्खियां बन गई। जानिए शरद पवार के जरिए PM से मिलने वाला किसान कौन हैं।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आकाश मसने

Who Is Jackfruit King Mithilesh Desai: सोशल मीडिया के इस युग में कौन रातों रात चर्चा का विषय बन जाए, कहा नहीं जा सकता। कोंकण के रत्नागिरी जिले में स्थित एक छोटे से गांव में कटहल की खेती करने वाले युवा किसान की सीधे पीएम मोदी से मुलाकात इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है।

रेवती सुले के रिसेप्शन में हुई बात

सोमवार को सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले और दामाद सारंग लखानी का रिसेप्शन समारोह दिल्ली में था। इस समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी समेत देशभर के बड़े राजनेता उपस्थित थे। इसी बीच एनसीपी नेता शरद पवार ने रत्नागिरी जिले के एक किसान मिथिलेश देसाई का परिचय सीधे पीएम मोदी से कराया और 'फणस किंग' (कटहल किंग) के नाम से मशहूर मिथिलेश ने मोदी को अपने काम और फणस यानी कटहल की खेती के बारे में जानकारी दी।

PM मोदी ने सुनी पूरी बात

पीएम मोदी और मिथिलेश की बातचीत का एक वीडियाे सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। रेवती सुले के रिसेप्शन में शरद पवार की बगल में बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े ही ध्यान से मिथिलेश की बात सुनते नजर आ रहे हैं। इस मुलाकात का वीडियो भी बड़े पैमाने पर वायरल हो रहा है।

कौन हैं 'फणस किंग' मिथिलेश?

मिथिलेश देसाई रत्नागिरी जिले के लांजा तालुका के झोपडे गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने राहुरी कृषि विद्यापीठ से एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। पढ़ाई के बाद उन्होंने UPSC की लिखित परीक्षा पास की, लेकिन इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी का विचार छोड़कर गांव लौटकर खेती करने का फैसला किया।

कटहल पर रिसर्च कर खड़ा कर दिया 1000 से अधिक किसानों का नेटवर्क

मिथिलेश के पिता 2010 से खेत में कटहल की खेती शुरू की थी और गर्मियों में वे हाथखंबा हाईवे पर जाकर कटहल बेचते थे। मिथिलेश ने कटहल की उपयोगिता को समझकर इस पर रिसर्च करने का फैसला किया। 2014 में उन्होंने 36 प्रजातियों के कटहल के 400 पेड़ लगाए।

2017 में केरल के वायनाड में कटहल पर हुई एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के बाद मिथिलेश का नजरिया बदल गया। उन्हें पता चला कि वियतनाम, मलेशिया और थाईलैंड में कटहल की भारी मांग है और इसमें औषधीय गुण भी होते हैं।

2020 में शुरू की किसान उत्पादक कंपनी

2020 में उन्होंने एक किसान उत्पादक कंपनी शुरू की। शुरुआत में 100 किसान थे, आज 1077 किसान इसके सदस्य हैं। यह कोकण की सबसे बड़ी किसान कंपनी है जो मुख्य रूप से कटहल, काजू और आम का उत्पादन करती है।

कटहल के पत्ते भी निर्यात किए

2022 में कंपनी को जर्मनी से कटहल के पत्तों की बड़ी ऑर्डर मिली। पहले साल 1 टन और दूसरे साल 5 टन पत्ते निर्यात किए गए। पता चला कि इन पत्तों से अर्क निकालकर जर्मनी में कैंसर के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है।

कृषि से पढ़ाई कर सरकारी नौकरी छोड़कर कटहल की खेती से हजारों किसानों को जोड़ने वाले मिथिलेश देसाई की कहानी अब मोदी से मुलाकात के बाद लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।

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