Ratnagiri Dead Fish River: रत्नागिरि जिले के चिपळूण के पास खेर्डी इलाके में नदी के पात्र में बड़ी मात्रा में मृत मछलियों का ढेर मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस चौंकाने वाली घटना के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
मृत मछलियों से फैली तीव्र दुर्गंध ने स्थानीय नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है। नदी के पानी पर तैरती सैकड़ों मृत मछलियों को देखकर नागरिकों में भारी आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नदी के पात्र में अचानक सैकड़ों मछलियाँ मृत अवस्था में तैरती हुई दिखाई दीं।
चूँकि नदी के किनारे बड़ी आबादी रहती है, इसलिए इन मृत मछलियों की दुर्गंध सीधे घरों तक पहुँच रही है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना पैदा हो गई है। इलाके में कोई गंभीर बीमारी फैलने से पहले प्रशासन तुरंत हरकत में आए, यह मांग जोर पकड़ रही है।
प्राथमिक संदेह जताया जा रहा है कि यह सब औद्योगिक अपशिष्ट जल के कारण हुआ है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि विशेष रूप से मानसून की शुरुआत में इस तरह जल स्रोतों का प्रदूषित होना चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि इस दुर्घटना की जड़ खेर्डी एमआईडीसी की कंपनियों द्वारा छोड़े गए रासायनिक अपशिष्ट जल में हो सकती है।
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चिपळूण के खेर्डी में नदी प्रदूषण और मछलियों की मौत की घटना ने प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों से विषैला और अनुपचारित पानी सीधे नदी में छोड़े जाने की शिकायतें वे पहले भी कई बार कर चुके हैं, लेकिन उनकी चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया गया। यह भीषण जल त्रासदी सीधे तौर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) की विफलता और लापरवाही को दर्शाती है, जिससे कंपनियाँ बेखौफ होकर नदी को प्रदूषित कर रही हैं।
क्रोधित ग्रामीणों ने इस 'पर्यावरणीय अपराध' की गहन जाँच के लिए राजस्व, पुलिस और MPCB की एक संयुक्त टीम गठित करने की मांग की है। उन्होंने पानी और मृत मछलियों के नमूने प्रमाणित प्रयोगशालाओं में भेजने और जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर ज़ोर दिया है। उनकी मांग है कि इस महापाप के दोषियों के खिलाफ सख्त आपराधिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाए। अब पूरे चिपळूण तालुका की निगाहें ज़िला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे इस बार 'कार्रवाई का बडगा' उबारेगा या मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि ठोस कार्रवाई न होने पर वे उग्र आंदोलन करेंगे।