उद्धव ठाकरे व बाल माने (सोर्स: डिजाइन फोटो) 
रायगड

कोंकण Vidhan Parishad Election में मची खलबली; आखिर उद्धव ठाकरे ने बाल माने को पार्टी से क्यों खदेडा?

कोंकण Vidhan Parishad Election में बड़ा धमाका! उद्धव ठाकरे ने बगावत करने वाले उम्मीदवार बाल माने को पार्टी से निकाला। जानिए इस राजनीतिक उठापटक की पूरी इनसाइड स्टोरी।

गोरक्ष पोफली

Konkan MLC Election 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में कोंकण का इलाका हमेशा से सत्ता संघर्ष का केंद्र रहा है, लेकिन हाल ही में कोंकण Vidhan Parishad Election 2026 के दौरान जो हुआ, उसने महाविकास अघाड़ी (MVA) विशेषकर उद्धव ठाकरे गुट को हिलाकर रख दिया है। सुरेंद्र उर्फ बाल माने, जिन्हें उद्धव ठाकरे ने बड़े भरोसे के साथ रायगड-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था, उनकी अचानक बगावत ने न केवल चुनाव का समीकरण बदल दिया, बल्कि उन्हें पार्टी से निष्कासित भी करा दिया।

आखिर क्यों खदेड़े गए बाल माने?

बाल माने के खिलाफ शिवसेना (यूबीटी) ने अत्यंत कठोर रुख अपनाया है। शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि बाल माने को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के आदेश पर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इस कड़ी कार्रवाई के पीछे का मुख्य कारण बाल माने का वह धोखा माना जा रहा है, जो उन्होंने नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन दिया। माने न केवल चुनावी मैदान से पीछे हटे, बल्कि वे भाजपा के कद्दावर नेता और मंत्री नितेश राणे के साथ रत्नागिरी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपना नामांकन वापस ले लिया। ठाकरे गुट के लिए यह एक बड़े अपमान की तरह था क्योंकि उनके उम्मीदवार ने ऐन वक्त पर विपक्षी खेमे के नेता के साथ जाकर आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे महायुति के उम्मीदवार अनिकेत तटकरे की निर्विरोध जीत का मार्ग प्रशस्त हो गया।

बाल माने का पक्ष: समर्थन की कमी का आरोप

अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के बाद बाल माने ने महाविकास अघाड़ी के भीतर की गुटबाजी और असहयोग की ओर इशारा किया। उन्होंने मीडिया से कहा कि इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 1018 मतदाता हैं, जिनमें से महाविकास अघाड़ी के पास केवल 200 के आसपास वोट थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपने ही गठबंधन के सहयोगियों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। माने के अनुसार, उनके नामांकन के लिए आवश्यक 10 सूचकों के हस्ताक्षर जुटाने में भी उन्हें दिक्कत हुई और महाविकास अघाड़ी के अन्य दलों ने उन्हें हस्ताक्षर देने से मना कर दिया।

माने ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव में सौदेबाजी शुरू हो गयी थी, जो कोंकण की संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि विधायक दलवी की बेटी की उम्मीदवारी के कारण महायुति में फूट की जो उम्मीद वे लगाए बैठे थे, वह भी खत्म हो गई क्योंकि उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था।

राजनीतिक भविष्य और घर वापसी के संकेत?

बाल माने, जो पहले भाजपा में थे और नारायण राणे के करीबी माने जाते थे, 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान ठाकरे गुट में शामिल हुए थे। उद्धव ठाकरे ने उन्हें सीधे उपनेता की जिम्मेदारी दी थी। हालांकि, नामांकन वापसी के समय नितेश राणे के साथ उनकी मौजूदगी ने उनकी घर वापसी की अटकलों को तेज कर दिया है। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे अगर-मगर की बात कहकर टाल दिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने कोंकण में उद्धव ठाकरे की घेराबंदी को कमजोर किया है और महायुति को एक बिना लड़ी हुई जीत तोहफे में दे दी है। इसी विश्वासघात के कारण उद्धव ठाकरे ने बिना देरी किए बाल माने को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

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