Pune Municipal Corporation Water Crisis: जून का महीना समाप्त होने को है, लेकिन मानसून की धीमी रफ्तार के कारण पुणे शहर इस समय बेहद गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। शहर को पानी की आपूर्ति करने वाले बांधों में जलस्तर लगातार गिर रहा है। वर्तमान में इन बांधों में केवल 3।60 टीएमसी पानी ही शेष बचा है, जिससे अनुमानतः अगले दो महीनों तक ही शहर की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए पुणे महानगर पालिका ने अब स्थिति से निपटने के लिए कृत्रिम वर्षा (आर्टिफिशियल रेन) कराने की संभावनाओं पर विचार करना शुरू कर दिया है। सोमवार को आयोजित मनपा की सर्वदलीय समूह नेताओं की बैठक में इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा हुई।
बैठक के बाद आयुक्त को कृत्रिम वर्षा से संबंधित सभी तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन कर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून में देरी के चलते पिछले 15 दिनों से शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन पानी की आपूर्ति की जा रही है, फिर भी जलस्तर में सुधार नहीं हो रहा है। प्रशासन अब यह पता
लगा रहा है कि क्या बांध क्षेत्रों में विमान के जरिए क्लाउड सीडिंग कराई जा सकती है, इसका खर्च कितना होगा और देश में इसके पिछले प्रयोग कितने सफल
रहे हैं। इस बीच, पाइपलाइन मरम्मत कार्य के कारण आगामी 2 जुलाई को पुणे शहर के कई प्रमुख इलाकों में जलापूर्ति पूरी तरह ठप रहेगी।
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पर्वती एचएलआर जल टंकी से पद्मावती पंपिंग स्टेशन जाने वाली मुख्य जलवाहिनी में रिसाव को ठीक करने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस कारण सहकार नगर, पद्मावती, बिबवेवाड़ी, तलजाई, महर्षि नगर, गंगाधाम और मार्केट यार्ड सहित कई आवासीय परिसरों में गुरुवार को पानी नहीं आएगा। अगले दिन शुक्रवार को भी सुबह देर से और कम दबाव के साथ आपूर्ति बहाल होगी। पुणे मनपा ने नागरिकों से अपील की है कि वे पानी का भंडारण करें और इसका बेहद सावधानी से इस्तेमाल करें।