Police Female Constable Gender Tansition: महाराष्ट्र के पुणे से एक बेहद ही अनोखा और कानूनी रूप से पेचीदा मामला सामने आया है। पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय में तैनात दो महिला कांस्टेबलों के आपस में शादी करने के फैसले ने प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। दोनों पुलिसकर्मियों ने 30 अगस्त को एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की कसमें खाने और शादी करने की योजना बनाई थी। हालांकि, जैसे ही उनके इस फैसले की भनक उनके परिवारों और समाज को लगी, भारी विरोध शुरू हो गया। पारिवारिक दबाव और बढ़ते विवाद को देखते हुए दोनों ने फिलहाल अपनी शादी को स्थगित करने का फैसला किया है।
पुणे में तैनात दो महिला पुलिस कांस्टेबल 30 अगस्त को शादी करने वाली थीं, लेकिन शादी की खबर सामने आने और विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने फिलहाल इसे स्थगित कर दिया है. अब दोनों अपने रिश्ते को कानूनी मान्यता दिलाने के विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि दोनों में से एक पुलिस कांस्टेबल जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया से गुजर रही है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि ट्रांजिशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्या उनकी शादी को मौजूदा कानून के तहत पंजीकृत कराया जा सकता है। दोनों महिलाओं के परिवार शादी के फैसले के खिलाफ हैं।
एक महिला के परिवार ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर शादी रोकने की मांग भी की थी। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह दोनों की निजी जिंदगी से जुड़ा मामला है और विभाग इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अधिकारियों की ओर से दोनों की काउंसलिंग भी कराई गई।
दोनों महिला पुलिसकर्मियों ने शादी के लिए ड्यूटी से छुट्टी लेने को लेकर विभाग में आवेदन किया था। खास बात यह रही कि दोनों ने अपने आवेदन के साथ शादी के निमंत्रण पत्र की प्रति भी जमा की। इसी के बाद उनकी शादी की योजना पुलिस विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में सामने आई।
दोनों महिलाओं की मुलाकात करीब तीन साल पहले पिंपरी-चिंचवड़ में पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान हुई थी। दोनों ने परीक्षा पास की और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद एक ही पुलिस थाने में उनकी तैनाती हुई। इसके बाद से दोनों साथ रह रही हैं। एक महिला उत्तरी महाराष्ट्र से है, जबकि दूसरी पुणे जिले के बाहरी इलाके के एक गांव की रहने वाली है।
भारत में बालिगों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंध अपराध नहीं हैं, लेकिन समलैंगिक विवाह को अभी कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में गैर-विषमलैंगिक जोड़ों के विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार करते हुए कहा था कि इस संबंध में कानून बनाना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में पुणे की दोनों पुलिसकर्मियों का मामला विवाह पंजीकरण, जेंडर पहचान और सरकारी सेवा रिकॉर्ड में बदलाव जैसे प्रशासनिक और कानूनी सवालों को सामने ला सकता है।
इसी बीच पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस में कार्यरत एक अन्य महिला पुलिसकर्मी द्वारा जेंडर रीअसाइनमेंट सर्जरी के बाद अपनी जेंडर पहचान के अनुरूप आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड में बदलाव की मांग किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। उनकी मांग पर फिलहाल संबंधित नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है।