Hariprasad Chaurasia GaneshChaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सांस्कृतिक शहर पुणे में प्रथम सार्वजनिक गणेशोत्सव के रूप में प्रसिद्ध 'श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति' की प्राणप्रतिष्ठा पूजा अत्यंत उत्साह और धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। भारत के महान बांसुरी वादक और शास्त्रीय संगीतज्ञ पद्मविभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने इस पवित्र प्राणप्रतिष्ठा समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में अपने हाथों से संपन्न कराया। उनकी उपस्थिति ने इस पारंपरिक और ऐतिहासिक समारोह की गरिमा में चार चांद लगा दिए।
ऐतिहासिक महत्व रखता है श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणेशोत्सव
महाराष्ट्र के गणेशोत्सव इतिहास में श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति का विशेष और गौरवशाली स्थान है। देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोकमान्य तिलक के साथ मिलकर सार्वजनिक गणेशोत्सव की नींव रखने में भाऊसाहेब रंगारी की मुख्य भूमिका रही थी। प्राणप्रतिष्ठा की इस मुख्य पूजा में वैदिक मंत्रोचार, पारंपरिक आरती और प्रार्थनाओं के माध्यम से भगवान गणेश का आह्वान किया गया। इस अवसर पर ट्रस्टी, पदाधिकारी और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करने वाले 88 वर्षीय पंडित हरिप्रसाद चौरसिया को संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 1984 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1992 में पद्म भूषण और वर्ष 2000 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। समारोह के दौरान उन्होंने गणेशोत्सव की शुभकामनाएं दीं और भारतीय कला व संस्कृति के संरक्षण पर बल दिया।
गणेश चतुर्थी के साथ ही पूरे महाराष्ट्र और देश भर में 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। पुणे और मुंबई सहित राज्य के सभी प्रमुख शहरों में 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों, ढोल-ताशों और सुबह की आरती के साथ बप्पा का घरों व सार्वजनिक मंडपों में भव्य स्वागत किया गया। मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा सहित पुणे के प्रमुख मान के गणपति मंडपों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।