Sheetal Tejwani Gets Bail: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े पुणे के मुंधवा में जमीन घोटाले के मामले में हाईकार्ट ने बड़ा फैसला दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपी शीतल तेजवानी को राहत देते हुए जमानत दे दी।
शीतल तेजवानी पुणे के मुंधवा में जमीन खरीद घोटाले के सिलसिले में हिरासत में थीं। इस घोटाले में NCP नेता पार्थ पवार से जुड़ी एक कंपनी शामिल थी। शीतल को पहले ही दो अन्य मामलों में जमानत मिल चुकी थी। अब इस मामले में भी जमानत मिलने के बाद, उनके यरवदा जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है।
कथित भूमि और बैंकिंग धोखाधड़ी के आरोपों में घिरीं शीतल तेजवानी के खिलाफ कुल तीन आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। तेजवानी ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए और इसे अवैध घोषित करने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
इससे पहले अप्रैल महीने में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तीन में से दो बैंक धोखाधड़ी के मामलों में उनकी गिरफ्तारी को नियम विरुद्ध माना था और उन्हें जमानत दे दी थी। हालांकि, उस वक्त अदालत ने लगभग 300 करोड़ के मुंढवा जमीन सौदे से जुड़े मामले में उनकी गिरफ्तारी को कानूनी रूप से वैध ठहराया था।
तेजवानी ने इस मामले में जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस अश्विन भोबे की सिंगल-जज बेंच के सामने उनकी याचिका पर विस्तार से सुनवाई हुई। इसके बाद, कोर्ट ने उनकी याचिका में दम पाया और उन्हें जमानत दे दी।
पुणे पुलिस की अपराध शाखा ने इस कथित घोटाले के सिलसिले में 3 दिसंबर 2025 को शीतल तेजवानी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि पुणे के मुंढवा इलाके की लगभग 40 एकड़ बेशकीमती जमीन का सौदा पार्थ पवार से जुड़ी एक कंपनी के फायदे के लिए किया गया था। इस हाई-प्रोफाइल सौदे की जांच शुरू होने के बाद पुलिस ने तेजवानी को इस पूरे मामले की मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए दो बार लंबी पूछताछ भी की थी।
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इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस जमीन की वास्तविक बाजार कीमत करीब 1,800 करोड़ रुपये आंकी गई थी, उसे कथित तौर पर महज 300 करोड़ रुपये के औने-पौने दाम में खरीद लिया गया। इसमें यह बात भी सामने आई कि इतने बड़े भूखंड के हस्तांतरण और सौदे के लिए केवल 500 रुपये की मामूली स्टांप ड्यूटी चुकाई गई थी।