रोहित पवार की चेतावनी: दिवाली से पहले किसानों के लिए राज्यव्यापी आंदोलन।
सूखा प्रभावित किसानों को ₹1 लाख और फल बागानों को ₹1.5 लाख प्रति हेक्टेयर सहायता की मांग।
₹5,000 की सरकारी मदद को अपर्याप्त बताया, चारे और पशुपालकों के लिए भी राहत मांगी।
Rohit Pawar Farmer Relief Demand: महाराष्ट्र में सूखे और बारिश की कमी से परेशान किसानों को राहत देने के मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि किसानों को हुए भारी नुकसान के मुकाबले सरकार की ओर से घोषित पांच हजार रुपये की सहायता अपर्याप्त है। किसानों को न्याय और उनका अधिकार दिलाने के लिए दिवाली से पहले राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। पवार ने चेतावनी दी कि इस वर्ष सरकार को दिवाली मनाने नहीं दी जाएगी।
शनिवार को पुणे में आयोजित पत्रकार वार्ता में रोहित पवार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश की कमी, घटते जल भंडार और कृषि उत्पादन पर मंडराते संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि सूखे से प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये और फल बागानों के लिए प्रति हेक्टेयर डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
रोहित पवार के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में औसत की तुलना में बेहद कम बारिश हुई है। उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में औसत के मुकाबले केवल 30 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है।
वहीं, नासिक संभाग में 34 प्रतिशत और पुणे संभाग में 31 प्रतिशत बारिश होने का दावा किया। बारिश की कमी से खरीफ की बुवाई प्रभावित हुई है और आने वाले समय में कृषि उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
उन्होंने जलाशयों में घटते पानी के भंडार पर भी चिंता जताई। पवार के मुताबिक, पुणे क्षेत्र के बांधों में जल भंडार 93 प्रतिशत से घटकर 81 प्रतिशत रह गया है, जबकि उजनी बांध में यह 80 प्रतिशत है।
पवार ने कहा कि सोयाबीन की खेती पर प्रति हेक्टेयर करीब 28 हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि सरकार केवल पांच हजार रुपये की सहायता दे रही है। उन्होंने लातूर के किसानों से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि कई किसानों ने शिकायत की है कि नुकसान का आकलन करने के लिए अधिकारी उनके खेतों तक नहीं पहुंचे।
उनके अनुसार, कुछ किसानों ने बताया कि उनकी खेती पर प्रति एकड़ सवा लाख रुपये से अधिक खर्च हुआ है। ऐसे में पांच हजार रुपये की सहायता से नुकसान की भरपाई संभव नहीं है।
विधायक ने फल बागानों को बचाने के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये का अनुदान देने की मांग की। साथ ही राज्य के 2.78 करोड़ पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और भेड़पालकों के लिए अलग योजना शुरू करने की बात कही। उन्होंने मराठवाड़ा में किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं का मुद्दा उठाते हुए कृषि संकट की गंभीरता पर ध्यान आकर्षित किया।
रोहित पवार ने सरकार के खर्च करने के तरीके की आलोचना करते हुए नई गाड़ियों, अधिकारियों के लंदन दौरों, शक्तिपीठ महामार्ग और कुंभमेले पर होने वाले खर्च का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिकों के कर से जुटाए गए धन का उपयोग किसानों को राहत देने के बजाय अन्य मदों पर किया जा रहा है।