Adivasi Student Marathi Speech Video: पुणे में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम से एक ऐसा दिल झकझोर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने महाराष्ट्र की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस कार्यक्रम में सुबह से ही तेज बुखार से पीड़ित होने के बावजूद एक आदिवासी छात्रा अपनी और अपने साथियों की व्यथा सुनाने मंच पर पहुंची। छात्रा ने जब अपनी मातृभाषा मराठी में राहुल गांधी के सामने आदिवासी छात्रों की बदहाली का दर्द बयां किया, तो पूरा सभागार सन्न रह गया।
छात्रा ने अपनी बात की शुरुआत करते हुए बताया कि उसे सुबह से बहुत तेज बुखार है, लेकिन वह पुणे के मांजरी इलाके में पिछले 10 दिनों से चल रहे अनशन स्थल से सीधे यहां आई है। उसने राहुल गांधी से कहा, मैं अपनी बात मराठी में समझाऊंगी ताकि यह सिर्फ मेरी अकेली की आवाज न लगे, बल्कि पूरे महाराष्ट्र और देश के सभी आदिवासी छात्रों की व्यथा बन सके।
छात्रा ने बताया कि उसके कई भाई-बहन अपनी बुनियादी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं, जिनमें से एक बहन की तबीयत इतनी नाजुक हो चुकी है कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
छात्रा ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों की संवेदनहीनता पर तीखा प्रहार किया। उसने बताया कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर आदिवासी विकास विभाग के मंत्रालय गए, तो वहां के मंत्री ने सीधे हाथ खड़े कर दिए और कहा कि सॉरी, मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता, यह मुख्यमंत्री के अधीन आता है।
इस पर छात्रा ने मंच से दहाड़ते हुए सवाल उठाया कि अगर आप छात्रों के विकास के लिए कुछ कर ही नहीं सकते, तो फिर आपको उस कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है।
छात्रा ने हॉस्टलों और आश्रमशालाओं की बदहाली के कई गंभीर मुद्दे उठाए-
दूषित भोजन और बीमारी: सरकार की 'सेंट्रल किचन' पद्धति के तहत भोजन एक जगह बनता है और उसे 70 से 80 किलोमीटर दूर भेजा जाता है, जिससे खाना खराब हो जाता है और छात्र फूड पॉइजनिंग का शिकार होते हैं।
गढ़चिरौली में मौतें: गढ़चिरौली की आदिवासी आश्रमशालाओं में पीने का साफ पानी और बेड तक की सुविधा नहीं है। वहां अव्यवस्था के चलते तीन विद्यार्थियों की जान चली गई और तीन आज भी अस्पताल में हैं। सरकार ने पीड़ित परिवारों को केवल 4 लाख रुपये की मदद दी, जबकि हमारी मांग कम से कम 1 करोड़ रुपये की थी।
पढ़ाई के समय की बर्बादी: पुणे में सरकारी आदिवासी हॉस्टल मुख्य शहर में न होकर मांजरी और कोंढवा जैसे बाहरी इलाकों में हैं, जिससे छात्रों को रोज आने-जाने में ही 4 घंटे लग जाते हैं और पढ़ाई के लिए वक्त नहीं बचता।
हॉस्टल की उम्र सीमा: हॉस्टल में रहने की नियमों की बंदिश के कारण वे केवल 30 वर्ष की उम्र तक ही रह सकते हैं, जिसे वे कम से कम 35 वर्ष करने की मांग कर रहे हैं।
छात्रा ने मंच से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दा उठाते हुए बताया कि गढ़चिरौली, नांदेड़ और अमरावती जैसे सुदूर इलाकों से आने वाली छात्राएं जब छुट्टियों के बाद एक महीने बाद हॉस्टल लौटती हैं, तो उनसे फिटनेस सर्टिफिकेट मांगा जाता है।
इस फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर लड़कियों का प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाता है। जब छात्राओं ने इस अपमानजनक प्रक्रिया पर आवाज उठाई, तो प्रशासन ने संक्रामक बीमारी की जांच का बहाना बना दिया। छात्रा ने सवाल किया कि प्रशासन हॉस्टलों में 24 घंटे एक नर्स की बुनियादी सुविधा क्यों नहीं रख पाता?
छात्रा के इस अदम्य साहस और गंभीर मुद्दों को सुनकर राहुल गांधी ने उसकी हिम्मत की सराहना की। उन्होंने छात्रा से सीधे कहा कि वह भी उनके इस आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं।
राहुल गांधी ने वादा करते हुए कहा, आप मुझे वहां आमंत्रित क्यों नहीं करतीं? मुझे बुला लो, मैं भी आ जाऊंगा और आपके साथ धरने पर बैठ जाऊंगा। हम सब मिलकर इस व्यवस्था पर दबाव बनाएंगे।