Purandar Airport Land Acquisition Project: बहुप्रतीक्षित पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना अब जमीन पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को अंतिम रूप देते हुए राज्य सरकार ने किसानों के लिए प्रति एकड़ 1 करोड़ 61 लाख 1 हजार 925 रुपये (व्याज सहित) का रिकॉर्ड मुआवजा देना तय किया है। यह जानकारी पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डूडी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।
जिलाधिकारी ने बताया कि परियोजना के लिए लगभग 3 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इसमें 7 गांवों की करीब 1216 हेक्टेयर भूमि शामिल है। किसानों से सहमति करार लेने की प्रक्रिया 7 मई से शुरू होगी, जबकि 10 जून तक सहमति नहीं देने वाले किसानों की जमीन का अनिवार्य अधिग्रहण किया जाएगा। पुरंदर एयरपोर्ट परियोजना के लिए सरकार पहले ही करीब 6 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने को मंजूरी दे चुकी है। अब वास्तविक काम शुरू होने जा रहा है। भूमि अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेज पुणे जिला कलेक्टर कार्यालय की भू-अधिग्रहण समन्वय शाखा और सासवड स्थित उपविभागीय अधिकारी कार्यालय में जमा किए जाएंगे।
इस परियोजना से लगभग 6,500 परिवार प्रभावित होगे पुनर्वास पैकेज के तहत प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा अधिग्रहित जमीन के बदले किसानों को एरोसिटी में 10 प्रतिशत विकसित भूखंड वापस दिया जाएगा।
इसके लिए प्रशासन ने 242 हेक्टेयर जमीन आरक्षित रखी है। जिन किसानों के धर परियोजना से प्रभावित होंगे, उन्हें ढाई गुंठा प्लॉट दिया जाएगा। किसानों को अपनी पसंद से एरोसिटी प्रवेशद्वार के पास या अपने गांव में उपलब्ध स्थान चुनने की छूट होगी।
प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए सात विशेष टीमें गठित की है। प्रत्येक टीम में नौ सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। प्रशासन का दावा है कि सहमति करार होते ही उसी दिन मुआवजे की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी।
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परियोजना के लिए केवल 3 हजार एकड़ जमीन की आवश्यकता होने के कारण आसपास की गैर-अधिग्रहित जमीनों पर लगे सरकारी आरक्षण और खरीद-बिक्री प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे स्थानीय किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। जिन जमीनों के मामले अदालत में लंबित हैं, उन पर न्यायालय के निर्णय के अनुसार कार्रवाई होगी। जिन किसानों के पास ढाई एकड़ से कम जमीन है और वे मूल निवासी है, उनके लिए सरकार विशेष योजना लागू करेगी।