Pune Water Master Plan: पुणे और आसपास के तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों की भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2047 तक का व्यापक 'वॉटर मास्टर प्लान' तैयार किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य बढ़ती आबादी के बीच पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करना और सिंचाई पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए नए जल स्त्रोतों की पहचान करना है। पुणे सिंचाई मंडल के अनुसार, मास्टर प्लान में पुणे महानगर पालिका, पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका, पीएमआरडीए, एमआईडीसी तथा पूरे पुणे महानगर क्षेत्र की वर्ष 2047 तक की जल जरूरतों का आकलन किया जा रहा है।
इसके तहत सीवेज के शुद्ध किए गए पानी का सिंचाई में उपयोग, कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण से मिले अतिरिक्त जल का प्रभावी इस्तेमाल तथा जलवायु परिवर्तन के संभावित असर को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाएगी। पुणे सिंचाई मंडल के अधीक्षक अभियंता प्रवीण कोल्हे ने बताया कि खडकवासला बांध प्रणाली मूल रूप से कृषि सिंचाई के लिए बनाई गई थी।
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शुरुआत में शहर के लिए केवल 5 टीएमसी पानी आरक्षित था, जो अब बढ़कर 14 टीएमसी हो चुका है। हालांकि, वर्तमान में शहर की वार्षिक खपत लगभग 22 टीएमसी तक पहुंच गई है, जिससे दौड और इंदापुर जैसे सिंचित क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है।
| विवरण | जल मात्रा (टीएमसी) |
|---|---|
| शहर की वर्तमान पानी की खपत | 22 टीएमसी |
| शहरी पेयजल के लिए आरक्षित पानी | 14 टीएमसी |
| कुल जल क्षमता | 29.15 टीएमसी |
| योजना का उद्देश्य | अगले 20 वर्षों की पानी की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रबंधन |