पुणे जिले में SIR के तहत 1,17,818 आवेदन प्राप्त हुए।
नए मतदाता पंजीकरण में हडपसर 10,506 और शिरूर 10,381 आवेदनों के साथ आगे।
शिवाजीनगर में 3,441 और पर्वती में 3,006 आवेदन; अंतिम संख्या जांच के बाद तय होगी।
Pune Voter List Summary Revision SIR Campaign: आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में पुणे जिले में मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया (विशेष पुनरीक्षण अभियान SIR) जोरों पर है। जिला निर्वाचन शाखा द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले के 21 विधानसभा क्षेत्रों से अब तक कुल 1,17,818 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या यानी 83,514 आवेदन नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए आए हैं।
वहीं, मतदाता सूची में दर्ज विवरणों में सुधार (करैक्शन) के लिए 32,880 और नाम हटाने (डिलीशन) के लिए 1,424 आवेदन दर्ज किए गए हैं। हडपसर और शिरूर में सबसे ज्यादा उत्साह विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, स्थानांतरित मतदाताओं के विवरण अपडेट करने और पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखने का काम जारी है।
इस दौरान हडपसर और शिरूर विधानसभा क्षेत्रों में भारी जन-उत्साह और राजनीतिक सक्रियता देखने को मिली है। हडपसर में सर्वाधिक 10,506 और शिरूर में 10,381 आवेदन जमा हुए हैं। इसके बाद भोर में 9,396, वडगांव शेरी में 9,073, चिंचवड़ में 8,434 तथा खेड़-आलंदी में 8,113 आवेदन दाखिल किए गए हैं। हडपसर और शिरूर जैसे क्षेत्रों में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते मतदाता सूची का यह अद्यतनीकरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके विपरीत, पुणे शहर के प्रमुख और पारंपरिक विधानसभा क्षेत्रों में आवेदनों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से काफी कम रही है।
प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का केंद्र माने जाने वाले शिवाजीनगर विधानसभा क्षेत्र में युवाओं और विद्यार्थियों की भारी आबादी के बावजूद केवल 3,441 आवेदन ही दाखिल हुए हैं।
इसी तरह, कसबा पेठ में 3,640, पर्वती में 3,006, बारामती में 3,800, पुणे कैंटोनमेंट में 3,929 और कोथरूड में 4,762 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण इन इलाकों में कम प्रतिसाद मिलने से राजनीतिक दलों की भूमिका और युवाओं की उदासीनता पर सवाल उठ रहे हैं।
जिला उप निर्वाचन अधिकारी मीनल कळसकर के अनुसार, आवेदन जमा होना और मतदाता सूची में नाम जुड़ना दो अलग-अलग चरण है।
प्राप्त सभी आवेदनों की गहन जांच, पात्रता के सत्यापन और प्रशासनिक मंजूरी के बाद ही नए मतदाताओं की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो पाएगी।
इसी तरह, नाम हटाने और विवरणों में संशोधन के आवेदनों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही नए शामिल मतदाताओं की सही तस्वीर सामने आएगी।