पुणे में ‘बॉस फ्रॉड’ के जरिए कर्मचारियों को निशाना बना रहे साइबर ठग।
फर्जी WhatsApp और ई-मेल से तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का दबाव।
ठगी से बचने के लिए आधिकारिक नंबर पर पुष्टि और दो-स्तरीय मंजूरी जरूरी।
Pune Pimpri Chinchwad Cyber Fraud: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र में साइबर अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब ठग कंपनियों के निदेशकों, सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग कर कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। इस तरीके को ‘बॉस फ्रॉड’ या ‘सीईओ फ्रॉड’ कहा जाता है।
इसमें ठग अधिकारियों के नाम, फोटो और पद का इस्तेमाल कर फर्जी व्हाट्सएप या ई-मेल अकाउंट बनाते हैं और अकाउंटेंट, मैनेजर तथा वित्तीय लेन-देन संभालने वाले कर्मचारियों से पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।
इस तरह की ठगी में कर्मचारियों को वरिष्ठ अधिकारी के नाम से संदेश भेजा जाता है। मैसेज में कहा जाता है कि अधिकारी किसी महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और किसी वेंडर का बिल तत्काल चुकाना है। इसके साथ ही एक बैंक खाते की जानकारी देकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश दिया जाता है।
पुणे शहर ठग अक्सर फोन पर बात करने से बचते हैं और पूरे लेन-देन को गोपनीय रखने का दबाव बनाते हैं। अधिकारी का संदेश समझकर कर्मचारी बिना पुष्टि किए रकम भेज देते हैं। बाद में पता चलता है कि संदेश भेजने वाला व्यक्ति असली अधिकारी नहीं, बल्कि साइबर ठग था। इस तरीके में ठगों को पीड़ित का बैंक खाता हैक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि वे भरोसे का फायदा उठाकर सीधे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
साइबर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रविकिरण नाले ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच मौजूद विश्वास का गलत फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज की नकल किए जाने की आशंका भी जताई है। ऐसे में केवल आवाज पहचानकर किसी वित्तीय निर्देश पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
किसी भी अनजान बैंक खाते में रकम भेजने से पहले संबंधित अधिकारी से उसके आधिकारिक नंबर पर सीधे संपर्क करके निर्देश की पुष्टि करनी चाहिए। केवल व्हाट्सएप संदेश या ई-मेल के आधार पर भुगतान नहीं करना चाहिए। कंपनी में बड़ी रकम के हस्तांतरण के लिए दो स्तरों पर मंजूरी और स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था भी उपयोगी हो सकती है।
संदिग्ध संदेश मिलने पर उसका जवाब देने या दिए गए खाते में पैसे भेजने के बजाय कंपनी के आईटी विभाग और साइबर पुलिस को सूचित करना चाहिए। जल्दबाजी और गोपनीयता का दबाव ऐसे फ्रॉड के प्रमुख संकेत हो सकते हैं।