पुणे मनपा शौचालय सफाई व्यवस्था (सोर्स-सोशल मीडिया)
पुणे

शौचालय सफाई के 100 करोड़ के टेंडर पर उठे सवाल, पुणे मनपा आयुक्त से मांगा खर्च का हिसाब

Pune PMC Toilet Cleaning Tender: पुणे मनपा के करीब 100 करोड़ रुपये के शौचालय सफाई टेंडर पर पूर्व पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने जांच पूरी होने तक टेंडर रोकने की मांग की।

वेदांत जोशी

PMC Sanitation Pune Civic News: पुणे महानगरपालिका (मनपा) के 15 क्षेत्रीय कार्यालयों के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक और बस्ती स्तर के शौचालयों की तीन शिफ्ट में रोजाना सफाई के लिए जारी किए गए करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पूर्व विपक्षी नेता उज्ज्वल केसकर, सुहास कुलकर्णी और पूर्व नगरसेवक प्रशांत बधे ने मनपा आयुक्त नवल किशोर राम को निवेदन देकर टेंडर प्रक्रिया की जांच कराने और जांच पूरी होने तक टेंडर पर रोक लगाने की मांग की है।

1,204 शौचालय और 15,107 सीटों का दिया गया हवाला

निवेदन में पूर्व पदाधिकारियों ने दावा किया है कि पुणे महानगरपालिका के 15 क्षेत्रीय कार्यालयों के अंतर्गत कुल 1,204 शौचालय और 15,107 सीटें हैं। उनके अनुसार, प्रत्येक सीट की रोजाना सफाई के लिए 85 रुपये की दर तय की गई है।

पूर्व पदाधिकारियों के मुताबिक, इस दर से प्रतिदिन करीब 12.84 लाख रुपये और सालाना लगभग 46.87 करोड़ रुपये का खर्च बैठता है। इसी आधार पर उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये के प्रस्तावित टेंडर की लागत को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। उनका सवाल है कि प्रति सीट 85 रुपये की दर किस आधार पर तय की गई और टेंडर की कुल अनुमानित राशि निर्धारित करने के पीछे क्या गणना है।

85 रुपये से कम दर पर भी उठाया सवाल

निवेदन में टेंडर की एक अन्य शर्त पर भी आपत्ति जताई गई है। पूर्व पदाधिकारियों ने दावा किया है कि 85 रुपये से कम दर भरने वाले ठेकेदार को अपात्र ठहराने की शर्त पर स्पष्टीकरण आवश्यक है।

इसके अलावा जोनवार टेंडर राशि और अनुमानित खर्च के बीच अंतर होने का भी दावा किया गया है। पूर्व पदाधिकारियों ने मनपा प्रशासन से टेंडर की लागत, दर निर्धारण और जोनवार राशि का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

बजट प्रावधान को लेकर भी मनपा से मांगा जवाब

पूर्व पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इस सफाई कार्य के लिए मनपा के बजट में अलग से कोई प्रावधान या बजट हेड नहीं है। उनका दावा है कि इसके बावजूद आवश्यक वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी किए बिना टेंडर जारी किया गया।

उन्होंने मनपा आयुक्त से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि टेंडर जारी करने से पहले बजट प्रावधान, प्रशासनिक मंजूरी और वित्तीय प्रक्रिया से संबंधित कौन-कौन से चरण पूरे किए गए हैं।

मनपा कर्मचारियों के भविष्य पर भी सवाल

निवेदन में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि मौजूदा मनपा कर्मचारियों से शौचालय सफाई का काम लेकर इसे ठेके पर दिया जाता है, तो इन कर्मचारियों को आगे कौन-सा वैकल्पिक काम दिया जाएगा। पूर्व पदाधिकारियों के अनुसार, टेंडर प्रस्ताव में इस संबंध में स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।

उन्होंने सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इंदौर मॉडल का अध्ययन करने और उसकी उपयोगिता के आधार पर पुणे में इसे लागू करने की संभावना पर भी विचार करने की मांग की है।

फिलहाल ये सवाल और आपत्तियां पूर्व पदाधिकारियों की ओर से मनपा आयुक्त को दिए गए निवेदन में उठाई गई हैं। टेंडर की लागत, बजट प्रावधान और दर निर्धारण पर मनपा प्रशासन की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

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