Maharashtra Farmers (फोटो- सोशल मीडिया) 
पुणे

मध्य पूर्व युद्ध की मार पुणे के किसानों पर: निर्यात के 50 कंटेनर लौटे वापस, करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण पुणे कस्टम विभाग से निर्यात हुए 50 कृषि कंटेनर वापस लौटे। तलेगांव और दिघी केंद्रों पर कामकाज ठप होने से किसानों को भारी आर्थिक चपत लगी है।

रूपम सिंह

Maharashtra Farmers News: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने सात समुंदर पार महाराष्ट्र के खेतों में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पिछले 17 दिनों से मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग पूरी तरह बाधित हो गए हैं। इसका सीधा प्रहार पुणे कस्टम विभाग के जरिए निर्यात होने वाले कृषि उत्पादों पर पड़ा है। ताजा जानकारी के अनुसार, निर्यात के लिए रवाना हुए लगभग 50 कंटेनर कृषि उत्पाद युद्ध की वजह से पुणे वापस लौट आए हैं, जिससे निर्यातकों और स्थानीय किसानों को करोड़ों रुपयों की चपत लगी है।

तलेगांव व दिघी में बंद पड़ा नियोत का प्रवेश द्वार

खाड़ी देशों में इन उत्पादों की भारी मांग रहती है, लेकिन युद्ध के कारण समुद्री और हवाई मार्ग असुरक्षित हो गए हैं। तलेगांव और दिघी जैसे प्रमुख केंद्रों से जो माल अरब देशों के लिए निकला था, वह गंतव्य तक नहीं पहुंच सका। चूंकि कृषि उत्पाद 'पेरिशेबल' होते हैं, इसलिए कंटेनरों के वापस लौटने का मतलब है कि किसानों की साल भर की मेहनत अब कौड़ियों के दाम बिकने की कगार पर है।

पुणे कस्टम विभाग के अंतर्गत तलेगांव (आईडीसी) और दिघी केंद्र महाराष्ट्र के कृषि निर्यात की रीढ़ माने जाते हैं। तलेगांव में स्थित 'ड्राय पोर्ट' की सुविधा के कारण किसानों को मुंबई के चक्कर नहीं काटने पड़ते थे। यहां खेतों से सीधा माल आता था, जिसकी कस्टम जांच और सीलिंग यहीं पूरी हो जाती थी। दिघी में गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया होती थी। इन दोनों केंद्रों के ठप्प होने से अब पश्चिम राज्य का पूरा सप्लाई चेन नेटवर्क पूरी तरह से चरमरा गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।

किसानों पर आर्थिक संकट

पुणे कस्टम आयुक्तालय का प्रभाव केवल पुणे शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका कार्यक्षेत्र सातारा, सांगली, कोल्हापुर और सोलापुर जैसे प्रमुख कृषि बेल्ट तक फैला हुआ है। इन जिलों के हजारों किसान सीधे तौर पर विदेशी बाजारों से जुड़े हैं।

युद्ध की अनिश्चितता ने न केवल वर्तमान खेप को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि भविष्य के ऑर्डर पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। ड्राई पोर्ट और अंतर्देशीय कंटेनर डिपो जैसी आधुनिक सुविधाएं इसलिए बनाई गई थीं ताकि परिवहन तेज हो सके, लेकिन वैश्विक भू-राजनीति ने इस पूरी व्यवस्था को बेअसर कर दिया है।

आश्रिखेला परी इस युद्ध से वैश्विक तरह प्रभावित हुई है। पुणे विभाग से निकले 50 कंटेनर केवल युद्ध के कारण खाड़ी देशों तक नहीं पहुंच पाए और वापस लौट आए हैं। कृषि माल नाशवंत होने के कारण इस देरी से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। हम स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहे हैं।

(अनिल डी. प्रधान, आयुक्त, सीमा शुल्क (कस्टम), पुणे विभाग)

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