पिंपरी-चिंचवड़ में अवैध निर्माणों की रजिस्ट्री पर रोक।
शहर में 1.42 लाख से अधिक अवैध निर्माण दर्ज, संख्या 3 लाख पार होने का अनुमान।
अवैध इमारतों को बिजली, पानी और ड्रेनेज कनेक्शन नहीं देने की तैयारी।
Pimpri Chinchwad Illegal Constructions: फ्लैट या मकान खरीदने वाले आम नागरिकों को बिल्डरों और भू- माफियाओं की धोखाधड़ी से बचाने के लिए राज्य सरकार ने एक अत्यंत कठोर और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
इसके तहत पिंपरी-चिंचवड़ शहर में हो रहे अनधिकृत और अवैध निर्माणों के दस्तावेजों के पंजीकरण (रजिस्ट्री) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। महानगरपालिका और राज्य प्रशासन द्वारा उठाए गए इन सख्त कदमों का उद्देश्य अवैध निर्माणों के करना और भविष्य में होने वाले वित्तीय धोखाधड़ी के जोखिमों को पूरी तरह से खत्म करना है।
अवैध निर्माणों के इस विस्तार पर अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की ओर से दिए गए हैं, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय हो गया है।
आंकड़ों के अनुसार, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड में कुल 7 लाख 92 हजार 399 संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से लगभग 1 लाख 42 हजार 653 निर्माण अवैध पाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या आवासीय निर्माणों की है, जो 1 लाख 23 हजार 41 तक पहुंच चुकी है।
इसके अतिरिक्त, 10 हजार 476 गैर आवासीय संपत्तियां और 1 हजार 836 अवैध औद्योगिक निर्माण भी सूची में शामिल हैं। हालांकि, प्रशासन का मानना है कि आधिकारिक रिकॉर्ड से परे अनधिकृत टीन शेड और अन्य निर्माणों को जोड़ दिया जाए, तो शहर में वास्तविक अवैध निर्माणों की संख्या तीन लाख से अधिक होने का अनुमान है।
ये निर्माण विशेषकर रेड जोन, बफर जोन, ग्रीन जोन, नदियों की लाल और नीली बाढ़ रेखा के दायरे, तथा आरक्षित भूखंडों और प्राकृतिक नालों के आसपास धड़ल्ले से किए जा रहे हैं। सरकार द्वारा वर्ष 2022 तक के निर्माणों को नियमित करने के लिए नीति लाई गई थी, लेकिन इसे अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके विपरीत, अवैध निर्माणों का दायरा लगातार बढ़ता गया। इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन ने अब कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं।
अवैध निर्माणों के पनपने के पीछे अक्सर स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की शिकायतें मिलती रही है। इस पर नकेल कसने के लिए महानगरपालिका ने बीट निरीक्षकों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नजर रखने का निर्णय लिया है।
अब प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बीट निरीक्षकों का हर तीन महीने के भीतर अनिवार्य रूप से तबादला किया जाएगा, जिससे अनधिकृत निर्माणों को मिलने चाले संरक्षण को समाप्त किया जा सके।
इससे इन जमीनों, मकानों, फ्लैटों और व्यावसायिक दुकानों की खरीद-बिक्री के दस्तावेजों का पंजीकरण तकनीकी रूप से असंभव हो गया है। अवैध निर्माणों को महावितरण की ओर से मिलने वाले बिजली कनेक्शन पर रोक लगाने के लिए
आधिकारिक पत्र भेजा जा रहा है। इसके साथ ही, जलापूर्ति विभाग और ड्रेनेज विभाग द्वारा नल कनेक्शन या मलजल निकासी लाइनें प्रदान नहीं की जाएंगी। यदि किसी ने चोरी-छिपे या अवैध तरीके से ये सुविधाएं हासिल करने का प्रयास किया।
सर्वे नंबरों की सटीक जानकारी मुद्रांक एवं पंजीकरण विभाग को उपलब्ध करा दी गई है, जिससे संबंधित क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के दस्तावेजों का पंजीकरण पूरी तरह से रुक जाएगा। महानगरपालिका की ओर से ऐसे अनधिकृत निर्माणों को किसी भी स्थिति में। नल और ड्रेनेज कनेक्शन नहीं दिए जाएंगे।डॉ. विजय सूर्यवंशी, आयुक्त, पिंपरी-चिंचवड मनपा