बस सेवा (सोर्स- सोशल मीडिया) 
पुणे

PMPML के 500 करोड़ के घाटे और खराब बस सेवा पर PMC की आमसभा में हंगामा, सत्ता-विपक्ष ने प्रशासन को घेरा

Pune PMPML Deficit Crisis: पीएमपीएमएल के 500 करोड़ के घाटे, पेंशन बकाए और बदहाल बस स्टॉप को लेकर पुणे मनपा की आमसभा में भारी हंगामा। पार्षदों ने वित्तीय जवाबदेही पर उठाए गंभीर सवाल।

रूपम सिंह

Pune Municipal Corporation: पुणे महानगर परिवहन महामंडल (पीएमपीएमएल) की बदहाल व्यवस्था सोमवार को पुणे महानगर पालिका की विशेष आमसभा में विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के निशाने पर भी रही। करोड़ों रुपये का अनुदान मिलने के बावजूद, यात्रियों को बदहाल बस सेवा और कर्मचारियों को पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने के मुद्दे पर सभी दलों के नगरसेवकों ने प्रशासन को जमकर घेरा।

वित्तीय घाटे, ई-बसों के लगातार ब्रेकडाउन, जर्जर बस स्टॉप, अवैध भर्ती और पेंशन भुगतान जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सदन में तीखी बहस हुई। दरअसल, वर्ष 2025-26 में पीएमपीएमएल के 808.26 करोड़ रुपये के परिचालन घाटे में पुणे महानगरपालिका की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी, यानी 484.96 करोड़ रुपये मंजूर करने के प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान सदस्यों ने सवाल उठाया

कि जब हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है, तो फिर परिवहन सेवा की स्थिति लगातार क्यों बिगड़ रही है? नगरसेवक पृथ्वीराज सुतार ने कहा कि पीएमपीएमएल का वार्षिक घाटा लगभग 500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, लेकिन इसकी वित्तीय जवाबदेही तय नहीं की जा रही है। उन्होंने मुख्य लेखा परीक्षक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि महामंडल की बहुमूल्य जमीनें नाममात्र के किराये पर दे दी गई हैं।

500 करोड़ रुपये तक पहुंचा वार्षिक घाटा

साथ ही, उन्होंने कथित अवैध भर्ती और पदोन्नति मामले की जांच रिपोर्ट तत्काल सदन के पटल पर रखने की मांग की। पूर्व महापौर वैशाली बनकर ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लंबित पेंशन, अर्जित अवकाश के भुगतान और चिकित्सा सुविधाओं का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद हजारों कर्मचारी और उनके परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे है, लेकिन प्रशासन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाया है। नगरसेविका ऐश्वर्या पठारे ने वाघोली, लोहगांव और वडगांव शेरी क्षेत्रों में बस सेवाएं बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि नगर रोड और आलंदी रोड से बीआरटी हटाने के बाद वैकल्पिक बस स्टॉप नहीं बनाए गए, जिससे यात्रियों को धूप और बारिश में खुले में इंतजार करना पड़ रहा है।

'स्मार्ट बस स्टॉप' की भी दुर्दशा

नगरसेवक सुनील पांडे ने 39 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद शहर में केवल एक शववाहिनी होने पर सवाल उठाए। उन्होंने जनप्रतिनिधि निधि से बनाए गए 100 से अधिक 'स्मार्ट बस स्टॉप' की बदहाल स्थिति, बंद पड़े सीसीटीवी कैमरे, अलार्म सिस्टम और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड की जांच कर 15 दिनों में रिपोर्ट पेश करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने मेट्रो और पीएमपीएमएल में 'नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड' को प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

मेट्रो और पीएमपीएमएल के बीच समन्वय की कमी

नगरसेवक पुनीत जोशी ने मेट्रो और पीएमपीएमएल के बीच समन्वय की कमी को उजागर करते हुए अधिक फीडर बसें शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहर के कई बस स्टॉप अब यात्रियों की सुविधा के बजाय राजनीतिक विज्ञापनों का केंद्र बन गए हैं।

कुणाल तिलक ने बाजीराव रोड बस हादसे के पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा देने के लिए अलग नीति बनाने की मांग की, जबकि सुभाष नाणेकर ने उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन के लिए महापालिका से हर महीने अतिरिक्त 7 से 8 करोड रुपये उपलब्ध कराने की मांग रखी।

करीब पूरे समय सदन में पीएमपीएमएल की वित्तीय स्थिति, यात्रियों की परेशानियों और प्रशासनिक जवाबदेही पर तीखी बहस होती रही। सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर प्रशासन से विस्तृत चर्चा शुक्रवार को की जाएगी।

अब नहीं जाएंगे जंतर-मंतर...रिहाई के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका ने क्या-क्या वादे किए?

अजेय रणनीतिकार: चुनावी रिकॉर्ड से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक, कैसे काम करती है अमित शाह की रणनीति?

Amit Shah Nickname: बचपन में अमित शाह को किस नाम से बुलाते थे? पढ़ें दिलचस्प किस्सा

एपस्टीन के साथ हरदीप पुरी की नई फोटो रिलीज, राहुल गांधी ने पूछा- किस गद्दार को ब्लैकमेल कर रहे हैं?

India Chem 2026: बॉम्बे एग्जीबिशन सेंटर में होगा भव्य आयोजन, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा करेंगे उद्घाटन