पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

Pune: रहाटणी-कालेवाड़ी में बदले सियासी समीकरण, विपक्ष की एकजुटता से भाजपा की बढ़ी चिंता

Pimpri Chinchwad Municipal Election में प्रभाग 27 भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। आंतरिक गुटबाजी और नागरिक समस्याओं के चलते इस बार मुकाबला बेहद कड़ा नजर आ रहा है।

अपूर्वा नायक

Pimpri Chinchwad News In Hindi: पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका चुनाव में प्रचार जोर-शोर से हो रहा है। रहाटणी-कालेवाड़ी के प्रभाग क्रमांक 27 में भी राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है।

पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस प्रभाग में क्लीन स्वीप करते हुए चारों सीटों पर अपना परचम लहराया था। हालांकि पार्टी के लिए इस 'अजेय किले' को सुरक्षित रखना इस बार प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।

बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों और स्थानीय नागरिकों की बढ़ती नाराजगी के बीच भाजपा के लिए इस बार चुनावी मुकाबले को जीतने की राह इतनी आसान नजर नहीं आ रही है।

प्रभागों की नई रचना और गुटबाजी से बदला समीकरण

वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के चंद्रकांत नखाते, सुनीता तापकीर, सविता खुले और बाबासाहेब त्रिभुवन ने जीत दर्ज कर इस प्रभाग को भाजपा का मजबूत गढ़ बना दिया था। उस समय 'मोदी लहर' और स्थानीय स्तर पर सांगठनिक मजबूती ने भाजपा को संजीवनी दी थी। लेकिन इस बार समीकरण अलग हैं। प्रभागों की नई रचना और जनसंख्या में भारी वृद्धि के कारण समीकरण बदल गए हैं। भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण को लेकर है। उम्मीदवारों की लंबी कतार और आंतरिक गुटबाजी के कारण पार्टी नेतृत्व के सामने असंतोष को थामना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।

महाविकास अघाड़ी की सक्रियता ने बढ़ाई चुनौती

दूसरी ओर, विपक्षी दल इस बार भाजपा के किले में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट), शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस जहां सत्ता विरोधी लहर को भुनाने की ताक में हैं, वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) और निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी जमीन तलाश रहे हैं। स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि विपक्ष ने एकजुट होकर मजबूत उम्मीदवार उतारा, तो भाजपा के लिए जीत की राह कठिन हो सकती है।

समस्याओं के भंवर में रहाटणी

पिछले एक दशक में रहाटणी और कालेवाड़ी क्षेत्र का शहरीकरण तेजी से हुआ है, लेकिन नागरिक सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। यहां पर ट्रैफिक जाम, पानी की किल्लत के साथ ही अवैध निर्माण और कचरा प्रबंधन की समस्या से लोग परेशान हैं।

शहर में सीमेंट की चमचमाती सड़कों के बावजूद तापकीर चौक और प्रमुख बाजारों में अतिक्रमण और अवैध पार्किंग ने यातायात का दम घोंट दिया है, तो वहीं आईटी पार्क के पास होने के बावजूद हाउसिंग सोसायटियों में टैंकर माफिया का बोलबाला है। प्रभाग में बढ़ते अवैध निर्माण और कचरा प्रबंधन की लचर व्यवस्था से मध्यमवर्गीय मतदाता परेशान हैं।

यहां के 90 प्रतिशत मध्यमवर्गीय मतदाता

प्रभाग 27 की संरचना ऐसी है कि यहां 90 प्रतिशत मतदाता मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं, जो बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों के आधार पर मतदान करते है। शेष 10 प्रतिशत झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में कामगार वर्ग की प्रधानता है। चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार नए पंजीकृत युवा मतदाता और 'साइलेंट चोटर' जिस ओर झुकेंगे, विजय का सेहरा उसी के सिर बंधेगा।

पिंपरी चिंचवड़ से नवभारत लाइव के लिए अमोल यलमार की रिपोर्ट

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