नसरापुर मासूम मर्डर केस (सोर्सः फाइल फोटो-नवभारत) 
पुणे

नसरापुर मासूम मर्डर केस में भीमराव कांबले को फांसी की सजा, कोर्ट ने माना 'दुर्लभ से दुर्लभतम' मामला

Nasrapur Case Pune: पुणे की विशेष अदालत ने नसरापुर में साढ़े तीन साल की बच्ची से दरिंदगी और हत्या के मामले में दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। नेताओं ने फैसले का स्वागत किया।

रूपम सिंह

Nasrapur Case Pune Bhimrao Kamble Death Penalty: नसरापुर की साढ़े तीन वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए भीमराव कांबले को विशेष अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। सजा सुनाते समय अदालत में एक ऐसा भावुक क्षण आया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया। विशेष न्यायाधीश एस।आर। सालुंखे ने आरोपी को अपने सामने खड़ा कर शांत लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, 'अब तुम्हें फांसी पर चढ़ना होगा।' इन शब्दों के साथ ही अदालत कक्ष में कुछ क्षणों के लिए पूरी तरह सन्नाटा छा गया। इस फैसले का विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी स्वागत किया।

आरोपी ने खुद को बताया निर्दोष

कानून के प्रावधानों के अनुसार सजा तय करने से पहले न्यायाधीश ने आरोपी से पूछा कि क्या वह अपने बचाव में कुछ कहना चाहता है। इस पर कांबले ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि उसने अपराध नहीं किया और बच्ची की मौत किसी अन्य कारण से हुई।

हालांकि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को निर्णायक मानते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी ने सुनियोजित ढंग से इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। न्यायालय ने इसे 'दुर्लभतम में दुर्लभ' श्रेणी का मामला मानते हुए मृत्युदंड सुनाया।

अपनी बेटी समझ कर जांच की, फैसले से संतुष्ट

जांच अधिकारी पुलिस निरीक्षक विजयमाला पवार ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार घटनास्थल पर मासूम का शव देखा था, तब एक मां होने के नाते उनका दिल दहल गया था। उसी समय उन्होंने तय कर लिया था कि दोषी को हर हाल में कानून के कठघरे तक पहुंचाया जाएगा।

पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि पूरी जांच टीम ने इस मामले को व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानकर काम किया। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने पीड़िता को अपनी बेटी समझकर दिन-रात मेहनत की, जिसके परिणामस्वरूप मात्र 15 दिनों में 1200 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया।

  • मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने बाताया की अपराध को 'दुर्लभतम में दुर्लभ' मानते हुए पुणे सत्र न्यायालय का यह फैसला न्याय व्यवस्था की दृढ़ता और अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है।
  • आम आदमी पार्टी मुकुंद किर्दत ने बाताया की  ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से समाज में कानून के प्रति विश्वास और अपराधियों में भय दोनों बढ़ेंगे।
  • डीसीएम सुनेत्रा पवार ने बाताया की अदालत के इस 66 अतालसक फैसले से पीड़ित बच्ची और उसके परिवार को सही मायने में न्याय मिला है, जिससे न्याय पालिका पर आम जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। इस फैसले से हम लोगों ने राहत की सांस ली है।
  • केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बाताया की यह मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध है। इस अपराध के विरुद्ध त्वरित और कठोर न्याय समय की मांग है। तेज न्याय प्रक्रिया से अदालत पर भरोसा बढ़ा है।
  • कांग्रेस की शहर अध्यक्ष दीप्ति चौधरी ने बाताया की  पुलिस की तेज जांच और कम समय में पूरी हुई सुनवाई के कारण पीड़िता को शीघ्र न्याय मिला। अदालत के फैसले का स्वागत करती हूं। यह फैसला न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और मजबूत करने वाला है।

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