Waterlogging Pune Control Room Incomplete Works: मानसून की दस्तक के साथ ही पुणे महानगर पालिका (पीसीएम) ने शहर में जलभराव, बाढ़ और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यापक तैयारियों का दावा किया है। प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष जिन 260 स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आई थी, उनकी पहचान कर विशेष उपाययोजनाएं बनाई गई हैं।
इनमें 140 स्थानों पर अस्थायी और 120 स्थानों पर स्थायी समाधान की आवश्यकता चिन्हित की गई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई प्री-मानसून कार्य अब भी अधूरे हैं, जिससे भारी बारिश की स्थिति में शहर के कई हिस्सों में जलभराव की आशंका बनी हुई है।
तीन-तीन करोड़ के टेंडर के जरिए कार्य : मनपा के मलनिःस्सारण विभाग की ओर से जोन 1 से 5 तक प्रत्येक जोन में तीन-तीन करोड़ रुपये के टेंडर जारी कर कुल 52 संवेदनशील स्थानों पर जल निकासी सुधार कार्य किए जा रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से 15 अन्य स्थानों पर स्थायी समाधान की दिशा में काम चल रहा है।
जोन 2 के संगमवाडी, लहुजी वस्ताद स्मारक मार्ग और रेंज हिल्स सर्कल-मुला रोड क्षेत्र में भी जल निकासी संबंधी कार्य जारी हैं। अचानक जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए यहां पांच बड़े पंपों की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का दावा है कि इन क्षेत्रों में नालों से गाद निकालने का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। ढोले पाटिल रोड, येरवडा-वडगांवशेरी और नगर रोड-वाघोली क्षेत्रों में विशेष तैयारियों का दावा किया गया है।
नगर रोड-वाघोली क्षेत्र में मोटर पंप तैनात किए गए हैं और वर्षा जल निकासी लाइनों की सफाई की गई है, जबकि येरवडा-वडगांवशेरी क्षेत्र में पंपिग मशीनरी और मनुष्यबल को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मानसून के दौरान त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मनपा मुख्यालय में 24 घंटे संचालित होने वाला केंद्रीय नियंत्रण कक्ष शुरू कर दिया गया है। विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में भी बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए गए हैं। आपातकालीन स्थिति में उपयोग के लिए आधुनिक मशीनरी, रेस्क्यू दल और विशेष कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।
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ढोले पाटिल क्षेत्रीय कार्यालय में चार बड़े पंप, फ्लड बैरियर तथा डीजल और इलेट्रिक पंप उपलब्ध हैं, जबकि नगर रोड-वाघोली क्षेत्र में तीन शिफ्टों में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। मानसून शुरू होने के बाद भी कई महत्वपूर्ण प्री-मानसून कार्य पूरे नहीं हो सके हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, नाला सफाई का कार्य
केवल 92 प्रतिशत, कल्वर्ट सफाई 90 प्रतिशत, ड्रेनेज चेंबरों की सफाई 88 प्रतिशत और सड़कों के किनारे बने वर्षा जल नालों की सफाई मात्र 83 प्रतिशत तक ही पूरी हो पाई है।ऐसे में यदि आने वाले दिनों में शहर में लगातार और भारी बारिश होती है तो अधूरे कार्यों के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या फिर गंभीर रूप ले सकती है। नागरिकों की नजर अब मनपा के दावों से अधिक जमीनी तैयारियों और मानसून के दौरान उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी हुई है।