महाराष्ट्र के 103 लॉ कॉलेजों के पास BCI की मान्यता नहीं (प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI) 
पुणे

महाराष्ट्र के लॉ कॉलेजों की खुली पोल, 103 के पास BCI की मान्यता नहीं, सरकार ने दी 6 महीने की मोहलत

Maharashtra Law Colleges News: महाराष्ट्र में लॉ एडमिशन प्रक्रिया के बीच चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य के 103 लॉ कॉलेजों के पास बीसीआई की मान्यता नहीं है। अब उन्हें 6 महीने की मोहलत दी गई है।

आकाश मसने

Maharashtra Law Colleges BCI Recognition Issue: महाराष्ट्र में विधि (Law) पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया पूरे जोर-शोर से चल रही है, लेकिन इस बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य के 100 से भी अधिक लॉ कॉलेजों के पास बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की मान्यता ही नहीं है। इस खुलासे के बाद उच्च शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। हालांकि, हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और उनके एडमिशन को ध्यान में रखते हुए सरकार और CET सेल ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिना मान्यता वाले इन कॉलेजों को बीसीआई से अप्रूवल प्राप्त करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है।

जांच में सामने आई बड़ी धांधली

राज्य सामायिक प्रवेश परीक्षा कक्ष (सीईटी सेल) के माध्यम से चल रही व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया में महाविद्यालयों को शामिल करने से पहले उनकी शासन मान्यता, विश्वविद्यालय मान्यता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता की जांच की जा रही हैं। यही नियम शिक्षा शास्त्र (बीएड) महाविद्यालयों पर भी लागू किया गया हैं।

राज्य में विधि पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कुल 352 महाविद्यालय हैं इन सभी महाविद्यालयों के पास बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता होना अनिवार्य हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि इनमें से 103 महाविद्यालयों के पास बीसीआई की मान्यता नहीं हैं।

शिक्षा मंत्री का निर्देश और विद्यार्थियों को राहत

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित 103 महाविद्यालयों को जल्द से जल्द बार काउंसिल ऑफ इंडिया की औपचारिकताएं पूरी कर मान्यता हासिल करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

हजारों विद्यार्थियों को मिलेगी राहत

यदि इन महाविद्यालयों को सीईटी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता तो विधि पाठ्यक्रम की सीटों में बड़ी कमी आ जाती और हजारों विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह सकते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संबंधित कॉलेजों को बीसीआई मान्यता प्राप्त करने के लिए छह महीने की मोहलत देने का निर्णय लिया हैं। इस निर्णय से विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली हैं।

उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. शैलेंद्र देवलाणकर ने नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए इस मामले में हस्तक्षेप किया हैं। हालांकि, इस पूरे मामले से यह भी स्पष्ट हुआ है कि कानून की शिक्षा देने वाली कई संस्थाएं ही निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रही हैं।

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