Pune Landslide Villages Maval tragedy: मालिण त्रासदी के बाद भी प्रशासन की सुस्ती खत्म नहीं हुई है। जिले के 72 भूस्खलन संभावित गांवों के पुनर्वास और सुरक्षा का मामला एक बार फिर गरमा गया है। मावल तहसील के पाटण गांव में हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।
दो वर्ष पहले जिला प्रशासन द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए प्रस्तावों में से अब तक केवल 44 गांवों को ही प्रशासनिक मंजूरी मिली है, जबकि 28 गांवों के प्रस्ताव अब भी ठंडे बस्ते में हैं। चिंताजनक बात यह है कि मंजूर 44 प्रस्तावों में से भी मात्र 22 गांवों में ही सुरक्षा और पुनर्वास का काम शुरू हो सका है।
15वें वित्त आयोग के तहत सार्वजनिक निर्माण विभाग ने 72 गांवों के लिए करीब 412 करोड़ रुपये की लागत वाले 160 प्रस्ताव तैयार किए थे। इनमें से 65 प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए भेजे गए थे। जिओलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) और भूजल सर्वेक्षण विभाग के अनुसार, जिले के 72 गांव भूस्खलन के अत्यधिक खतरे में हैं। इनमें मावल के 15, राजगढ़ के 10 मुलशी के 8, खेड़ के 6 जुन्नर के 5 और भोर के 5 गांव शामिल है।
अधिकारियों के मुताबिक, लंबित 28 गांवी का दोबारा सर्व किया जा रहा है, ताकि वर्तमान स्थिति और खतरे का आकलन कर नया प्रस्ताव भेजा जा सके। वर्तमान में चल रहे काम भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास पैकेज के विभिन्न चरणों में है।
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मावल के विसापुर किले की तलहटी में बसे पाटण गांव में हाल ही में हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने बताया कि यह गांव पहले से घोषित संभावित सूची में नहीं था।
उन्होंने आश्वस्त किया कि मानसून के बाद जीएसआई के जरिए नए संवेदनशील स्थानों का दोबारा व्यापक सर्वेक्षण कराया जाएगा। फिलहाल सभी तहसीलदारों को आपात स्थिति के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है।