जमीन विवाद, प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
पुणे

कोरेगांव भीमा जयस्तंभ जमीन विवाद: पुणे कोर्ट से जमादार परिवार को राहत, 9.25 एकड़ पर स्थायी कब्जे का आदेश

Land Dispute Pune: कोरेगांव भीमा जयस्तंभ से सटी 9.25 एकड़ जमीन के कब्जे को लेकर चल रहे दशक पुराने विवाद में पुणे की अदालत ने जमादार-मालवदकर परिवार के स्थायी कब्जे के पक्ष में आदेश दिया है।

रूपम सिंह

Koregaon Bhima Jaystambh Land Dispute: कोरेगांव भीमा के ऐतिहासिक जयस्तंभ और उससे सटी करीब 9.25 एकड़ जमीन के कब्जे को लेकर चल रहे विवाद में जमादार-मालवदकर परिवार को अदालत से बड़ी राहत मिली है।

पुणे की अदालत ने पेरणे गांव स्थित इस जमीन पर परिवार के स्थायी कब्जे के पक्ष में आदेश दिया है। संयुक्त सिविल जज (वरिष्ठ स्तर) अमोल शिंदे ने शुक्रवार को यह आदेश पारित किया।

जमीन पुणे-अहिल्यानगर राजमार्ग पर स्थित है। यह विवाद करीब एक दशक से अधिक समय से चला आ रहा था। एक ओर भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ संरक्षण एवं संवर्धन समिति ने जमीन के रिकॉर्ड में जमादार परिवार का नाम दर्ज होने पर सवाल उठाए थे,

वहीं परिवार ने ब्रिटिश काल की मूल सनद और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अपने अधिकार का दावा किया था। अब अदालत के आदेश से इस विवाद में परिवार को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है।

1822 में बनाया गया था जयस्तंभ

ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1822 में जयस्तंभ का निर्माण कराया था। यह स्मारक 1 जनवरी 1818 को कोरेगांव-भीमा में पेशवाओं के खिलाफ लड़ाई में मारे गए ब्रिटिश सैनिकों की स्मृति में बनाया गया था।

इस युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने 13 दिसंबर 1824 को युद्ध में घायल हुए अपने सैनिक कोंडोजीबिन गजोजी जमादार को जयस्तंभ की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी थी। परिवार के अनुसार, इसी दौरान ब्रिटिश सरकार ने उन्हें एक आधिकारिक सनद जारी की थी।

ब्रिटिश काल की मूल सनद सहित अन्य दस्तावेज पेश

इस सनद के आधार पर परिवार का दावा है कि करीब 260 एकड़ जमीन उनके परिवार के कब्जे में दी गई थी। इसमें जयस्तंभ और उसके आसपास की जमीन भी शामिल थी। यह व्यवस्था परिवार के पुरुष उत्तराधिकारियों के रहने तक जारी रहने की बात सनद में दर्ज होने का दावा किया गया है।

जमादार मालवदकर परिवार के छठे वंशज और सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी कैप्टन बालासाहेब जमादार-मालवदकर ने अदालत में ब्रिटिश काल की मूल सनद सहित अन्य दस्तावेज पेश किए।

परिवार ने इन्हीं दस्तावेजों को अपने दावे का प्रमुख आधार बनाया अदालत के समक्ष यह भी बताया सया कि परिवार लंबे समय से उक्त जमीन पर रह रहा है और उसका उपयोग करता आ रहा है।

परिवार की ओर से यह दावा किया गया कि उसे जमीन से हटाने की कार्रवाई की तैयारी के बाद अदालत की शरण ली गई थी। सितंबर 2015 में भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ संरक्षण एवं संवर्धन समिति ने तत्कालीन सामाजिक न्याय राज्यमंत्री राजकुमार बडोले को पत्र भेजकर जयस्तंभ से सटी जमीन के 7/12 रिकॉर्ड में जमादार (मालवदकर) परिवार का नाम दर्ज होने पर आपत्ति जताई थी। समिति ने आरोप लगाया था कि परिवार का नाम 7/12 उतारे में कथित रूप से अवैध तरीके से दर्ज किया गया है

BRICS Summit: नई दिल्ली घोषणापत्र से मिलेगी भविष्य को नई दिशा, PM मोदी बोले- अब ग्राउंड लेवल पर दिखेंगे नतीजे

इलाहाबाद HC के फैसले को मेधा रूपम ने दी चुनौती, आकृति चौधरी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची नोएडा डीएम

BRICS Summit 2026 LIVE: PM नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन की घोषणा की

BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग ने AI, ट्रेड और डिजिटल इकोसिस्टम समेत 5 नई पहलों का किया प्रस्ताव

BRICS Summit: पीएम मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति अल सिसी में द्विपक्षीय वार्ता, नई दिल्ली घोषणापत्र पर लगी मुहर