Siya Goyal Lawyer Claims Not A Murder: लोणावला के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल के वकील, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने पुलिस की जांच और इस केस को मर्डर का रंग देने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि डिफेंस के नजरिए से इस मामले को हत्या के मुकदमे के रूप में चलाने का कोई भी ठोस आधार मौजूद नहीं है।
एडवोकेट श्रीवास्तव ने अपनी दलीलों में इस बात पर जोर दिया कि शुरू में यह मामला एक्सीडेंटल डेथ के रूप में देखा जा रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जांच एजेंसी को अचानक ऐसा क्या लगा कि इस मामले को मर्डर एंगल से देखना शुरू कर दिया गया? वकील के अनुसार, कल होने वाली कोर्ट की कार्यवाही में वे इन तथ्यों को प्रमुखता से रखेंगे कि आखिर किस आधार पर जांच की दिशा बदली गई, क्योंकि उन्हें इसमें हत्या का कोई भी ठोस कारण नजर नहीं आता।
पुलिस के उस दावे पर, जिसमें कहा गया था कि आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है, वकील ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम-BSA की धारा 23 का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस हिरासत में दिया गया कोई भी बयान अदालत में मान्य नहीं होता। उनके अनुसार, हिरासत के दौरान आरोपी अक्सर दबाव या धमकी के साये में होते हैं, इसलिए ऐसे कन्फेशन को कानूनी तौर पर सबूत नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक इस मामले में कोई ठोस कोरोबोरेटिव एविडेंस सामने नहीं आया है।
बचाव पक्ष का तर्क है कि सिया गोयल ने पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान पुलिस को हर संभव सहयोग दिया है। पुलिस को पूछताछ और जानकारी जुटाने के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है, इसलिए अब और पुलिस रिमांड की मांग करना तर्कसंगत नहीं है। अब वकील अपनी क्लाइंट के लिए न्यायिक हिरासत की मांग कर रहे हैं ताकि कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ सके।
यह भी पढ़ें: 1.5 करोड़ की डील और दिल्ली कनेक्शन, TET पेपर लीक के आरोपियों की आज कोर्ट में पेशी, जानें कैसे रची गई साजिश?
हाल ही में पुलिस द्वारा किए गए क्राइम सीन रिक्रिएशन पर प्रतिक्रिया देते हुए वकील ने कहा कि यह केवल यह समझने के लिए होता है कि उस दिन क्या संभावनाएं रही होंगी। उन्होंने इसे ठोस साक्ष्य मानने से इनकार कर दिया और कहा कि यह केवल अन्य सबूतों के साथ सह-संबंध बिठाने का एक माध्यम मात्र है। फिलहाल, एडवोकेट श्रीवास्तव की इन दलीलों ने पुलिस की थ्योरी पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।