लोहगढ किले सीसीटीवी के कैद चेतन चौधरी (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

क्या है Gait Analysis? केतन अग्रवाल हत्याकांड के आरोपी चेतन चौधरी का क्यों कराया ये टेस्ट, जानें पूरी तकनीक

What Is Gait Analysis: पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस ने आरोपी का 'गेट एनालिसिस' टेस्ट कराया है। जानिए क्या है फॉरेंसिक विज्ञान की यह आधुनिक तकनीक और कैसे किसी की चाल खोलती है अपराध के राज।

आकाश मसने

Chetan Chaudhary Gait Analysis Explained: पुणे के 26 साल के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच तेज हो गई है। इस मामले में फॉरेंसिक विज्ञान की एक आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। पुणे ग्रामीण पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस किया।

पुणे ग्रामीण पुलिस ने केतन अग्रवाल हत्याकांड के आरोपी चेतन चौधरी को लोहगढ़ किले ले गई थी। जहां लगभग 2 घंटे 40 मिनट तक क्राइम सीन को फिर से तैयार किया और उसके चलने के तरीके (Gait Analysis) का विश्लेषण किया।

क्या है गेट एनालिसिस?

गेट एनालिसिस एक साइंटिफिक फॉरेंसिक टेक्निक है, जिसमें किसी व्यक्ति के चलने के तरीके का अध्ययन किया जाता है। गेट एनालिसिस वह फॉरेंसिक तकनीक है जो लोगों की पहचान उनके चलने के खास तरीके, शरीर की मुद्रा (पोस्चर), कदम की लंबाई, अंगों की हरकत और कुल मिलाकर बायोमैकेनिक्स के आधार पर करती है।

माना जाता है कि हर व्यक्ति की चाल उसके शरीर की बनावट, हड्डियों की संरचना, पैरों की लंबाई, जोड़ों की गतिविधि और शरीर के संतुलन पर आधारित होती है। यही कारण है कि किसी व्यक्ति की चाल को पूरी तरह बदलना आसान नहीं होता।

इस प्रक्रिया के तहत, आरोपी को वैसे ही कपड़े पहनने हाेते है जैसे CCTV फुटेज में दिखे थे और फिर उसी रास्ते पर चलना होता है। इसके बाद, दोबारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो की तुलना असली फुटेज से की जाती ताकि चलने के तरीके में समानताएं देखी जा सकें।

क्या है Gait Analysis (सोर्स: AI)

चेतन चौधरी को क्यों हो रहा ये टेस्ट?

केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस के हाथ एक सीसीटीवी फुटेज लगा है। इसमें लोहागढ़ किले के पास लगे सीसीटीवी कैमरों में एक हुडी पहने व्यक्ति दिखाई दिया था। पुलिस का दावा है कि वो व्यक्ति चेतन चौधरी हो सकता है। लेकिन हुडी से सिर ढकने और मास्क पहनने की वहज से कैमरे में उसका चेहरा स्पष्ट नहीं दिख रहा है। ऐसे में सामान्य फेस रिकग्निशन तकनीक ज्यादा मददगार साबित नहीं हुई।

क्या गेट इनालिसिस से किसी काे दोषी साबित किया जा सकता है?

फॉरेंसिक जानकारों की माने तो गेट एनालिसिस किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का आधार नहीं होता। ये केवल एक स्पोटिंग साइंटिफिक एविडेंस होता है। कोर्ट में किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य फॉरेंसिक सबूतों की भी आवश्कता होती है।

केतन अग्रवाल, आरोपी सिया गोयल व चेतन चौधरी (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)

दुनिया के कई देशों में हो चुका है गेट इनालिसिस इस्तेमाल

गेट एनालिसिस कोई नई तकनीक नहीं है। इसका इस्तेमाल UK में हत्या, डकैती और यौन अपराधों से जुड़ी कई मामलों में किया गया है। 2011 के लंदन में हुए दंगों के दौरान संदिग्धों की पहचान करने के लिए भी इस टेक्निक का इस्तेमाल किया गया था। इसी तरह, चीन में सुरक्षा और निगरानी के लिए AI-आधारित चाल पहचानने वाले सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में हुई तरक्की ने गेट एनालिसिस को पहले से कहीं अधिक असरदार बना दिया है।

लोहगढ़ किले पर हुई थी केतन अग्रवाल की हत्या

बता दें कि 18 जून को लोहगढ़ किले पर केतन अग्रवाल की कथित तौर पर उनकी 20 साल की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने धक्का देकर हत्या कर दी थी। पहले सिया ने इसे एक हादसा बताया था। उसने बताया था कि सेल्फी लेते समय पैर फिसलने से केतन खाई में गिर गया और उसकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस जांच के बाद सिया के बिहेवियर व अन्य सबूतों ने इस मामले में हत्या का एंगल ला दिया। पुलिस ने इस मामले में सिया गाेयल और चेतन चौधरी का गिरफ्तार किया है।

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