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पुणे में संचमान्यता नीति के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन, 10 हजार पदों पर संकट की आशंका

Pune Teachers Protest: पुणे में कनिष्ठ महाविद्यालयीन शिक्षकों ने प्रस्तावित संचमान्यता नीति के विरोध में प्रदर्शन किया। नीति लागू होने पर 10 हजार शिक्षकों के अतिरिक्त होने की आशंका जताई।

रूपम सिंह

Pune Junior College Teachers Association Protest: उच्च माध्यमिक स्तर पर प्रस्तावित संचमान्यता नीति के विरोध में श्री स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्था, कोल्हापुर और महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ महाविद्यालयीन शिक्षक महासंघ की ओर से पुणे स्थित शिक्षा निदेशक कार्यालय के सामने धरना आंदोलन किया गया। आंदोलनकारियों ने प्रस्तावित संचमान्यता मसौदे को तत्काल रद्द कर वर्तमान मानदंडों के अनुसार संचमान्यता करने की मांग की।

शिक्षकों का कहना है कि प्रस्तावित नीति लागू होने पर राज्य में करीब 8 से 10 हजार शिक्षक अतिरिक्त घोषित हो सकते हैं। इससे कई पूर्णकालिक शिक्षक अंशकालिक हो सकते हैं और उनकी सेवासुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है। आंदोलनकारियों ने कहा कि इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके शैक्षणिक भविष्य पर भी पड़ सकता है।

45 मिनट की कक्षा अवधि घटाकर 40 मिनट करने का प्रस्ताव

प्रस्तावित मसौदे में कक्षा की अवधि 45 मिनट से घटाकर 40 मिनट करने का सुझाव दिया गया है। शिक्षकों के अनुसार, कक्षा अवधि में बदलाव होने से कक्षाओं की गणना प्रभावित होगी और इसके चलते शिक्षक पद अतिरिक्त घोषित होने की स्थिति बन सकती है।

इसके अलावा विज्ञान शाखा की एक बैच में विद्यार्थियों की संख्या 20 से बढ़ाकर 30 करने का प्रस्ताव है। शिक्षकों का दावा है कि इससे विज्ञान शाखा के शिक्षक पदों पर भी असर पड़ सकता है।

कला-वाणिज्य शाखाओं के लिए 120 विद्यार्थियों का मानदंड

वरिष्ठ महाविद्यालय से संबद्ध कनिष्ठ महाविद्यालयों में कला और वाणिज्य शाखाओं के लिए 120 विद्यार्थियों का मानदंड प्रस्तावित किया गया है।

आंदोलनकारियों के मुताबिक, इस मानदंड के कारण कई कक्षाएं अनुदान के लिए अपात्र हो सकती हैं। इससे पहले से कार्यरत शिक्षकों की सेवासुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

सरकार से मसौदे पर पुनर्विचार की मांग

शिक्षक मित्र कौस्तुभ गावडे ने कहा कि प्रस्तावित नीति लागू होने पर हजारों शिक्षक अतिरिक्त घोषित होने की आशंका है। इससे पूर्णकालिक शिक्षकों के अंशकालिक होने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षक सेवासुरक्षा और विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए मसौदे पर तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए।

आंदोलन में दिलीप शितोळे, अण्णासाहेब बागडी, सुनील शिंदे, सुरेश भिसे, अभिजीत दुर्गी समेत विभिन्न जिलों से आए शिक्षक शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने सरकार से प्रस्तावित संचमान्यता नीति को रद्द कर मौजूदा नियमों के आधार पर प्रक्रिया जारी रखने की मांग दोहराई।

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