तुकाराम महाराज पालकी जनसैलाब (सोर्स-सोशल मीडिया) 
पुणे

इंदापुर में भक्तिभाव से संपन्न हुआ संत तुकाराम महाराज पालकी का रिंगण समारोह: उमड़ा वारकरियों का भारी जनसैलाब

pune Sant Tukaram Palkhi: पुणे के इंदापुर में संत तुकाराम महाराज पालकी का भव्य रिंगण समारोह संपन्न हुआ। हजारों वारकरियों ने 'ज्ञानोबा-तुकाराम' के जयघोष के साथ पारंपरिक खेलों में भाग लिया।

रूपम सिंह

Sant Tukaram Maharaj Palkhi Ringan: 'जहां जाता हूं वहां तू मेरा साथी है, हाथ पकड़कर तू ही रास्ता दिखाता है...' संत तुकाराम महाराज के अभंग के भावार्थ को साकार करते हुए संत तुकाराम महाराज पालकी समारोह का रिंगण समारोह इंदापुर नगरी में भक्तिभाव और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। ताल-मृदंग की गूंज, 'ज्ञानोबा-तुकाराम' के अखंड जयघोष, झिम्मा फुगड़ी के उत्साह और हजारों वारकरियों की उपस्थिति से पूरा इंदापुर शहर विठ्ठलमय हो गया।

संत तुकाराम महाराज की पालकी का रथ सुबह 11.51 बजे रयत शिक्षण संस्था के सौ. कस्तुरबाई श्रीपति कदम विद्यालय के प्रांगण में पहुंचा। इस दौरान हल्की बारिश की फुहारों ने भी समारोह के मंगलमय वातावरण में और रंग भर दिया।

समारोह की शुरुआत नगाड़ाखाना, दिंडी, हंडा, तुलसी और वीणा की पारंपरिक मान-परंपरा के साथ हुई। इसके बाद मान के अश्व का रिंगण संपन्न हुआ। रिंगण के बाद वारकरियों, महिलाओं और श्रद्धालुओं ने झिम्मा, फुगड़ी सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों में भाग लिया और विठ्ठल नाम का जयघोष किया। जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए अन्नदान की व्यवस्था भी की गई थी। निमगांव केतकी में रात्रि विश्राम के बाद

प्रातःकालीन आरती के उपरांत संत

तुकाराम महाराज की पालकी इंदापुर शहर पहुंची। रिंगण समारोह के बाद पालखी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) परिसर में रात्रि विश्राम के लिए ठहरी। रविवार को पालकी का इंदापुर तहसील में चौथा तथा पुणे जिले का अंतिम पड़ाव सराटी में होगा।

मान के अश्व की चरणधूल माथे पर लगाने उमड़ी भीड़

  • मान के अश्व का रिंगण शुरू होते ही पूरे परिसर में 'ज्ञानोबा-तुकाराम' के जयघोष गूंज उठे।
  • दौड़ते हुए अश्व के पैरों से उड़ने वाली पवित्र मिट्टी को माथे पर लगाने के लिए वारकरियों में भारी उत्साह देखा गया।
  • श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस मिट्टी में भगवान विठ्ठल और संतों के चरणों का पुण्य समाया हुआ है।
  • इसी श्रद्धा के साथ वारकरियों ने मिट्टी को माथे पर लगाकर आशीर्वाद स्वरूप ग्रहण किया।
  • भक्ति, श्रद्धा और समर्पण से भरे इस भावपूर्ण दृश्य ने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया।

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