प्याज उत्पादक (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

Baramati में प्याज किसानों पर संकट, 9 महीने स्टॉक रखने के बाद भी नहीं मिले दाम

Baramati में प्याज किसानों को 9 महीने स्टॉक रखने के बाद भी उचित कीमत नहीं मिल रही। बढ़ती लागत, गिरते दाम और मजदूरी संकट के कारण किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और कई फसल तक नष्ट कर रहे हैं।

अपूर्वा नायक

Onion Price In Pune: महीनों के इंतजार के बाद भी प्याज की कीमतों में सुधार न होने के कारण बारामती तहसील के किसान हताश हैं। अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद में किसानों ने अपने ग्रीष्मकालीन प्याज को लगभग नौ महीने तक जमा कर रखा था, लेकिन अब यह बिक्री के अंतिम चरण में है और इस महीने के अंत तक खत्म हो जाएगा।

इसके बाद ग्राहकों को नए प्याज से ही संतोष करना पड़ेगा। प्याज उत्पादन के लिए किया गया खर्च भी नहीं निकल पाया है। एक एकड़ प्याज के उत्पादन के लिए औसतन 70 से 80 हजार रुपये तक का खर्च आता है, जिसमें प्याज लगाना, मजदूरी, बेसल डोस, पौधे, रासायनिक खाद, स्प्रे, कटाई, परिवहन और भंडार शामिल है।

किसानों के अनुसार, उत्पादित प्याज की एक बोरी पर सभी खचों को काटकर एक हजार रुपये मिले, तभी किसान के हाथ में कुछ पैसे बचते हैं, अन्यथा उन्हें अपनी जेब से पैसे लगाने पड़ते हैं। परिणामस्वरूप, प्याज उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

प्याज उत्पादक किसानों ने इस उम्मीद में अप्रैल महीने में प्याज का स्टॉक कर रखा था कि आज नहीं तो कल दाम बढ़ेंगे। किसानों ने नौ महीने तक प्याज का स्टॉक किया, लेकिन सरकारी नीतियों, निर्मात प्रतिबंधों और बड़े पैमाने पर हुए उत्पादन के कारण पिछले एक साल से प्याज उत्पादक किसान परेशान हैं। गन्ने की तरह ही प्याज को भी नगदी फसल माना जाता है, लेकिन हाल के दिनों में यह लॉटरी के खेल जैसा हो गया है। अगर पैसे मिल गए तो मिल गए, नहीं तो इसे कौड़ियों के भाव बेचना पड़ता है।

एक एकड़ प्याज लगाने के लिए बीज पर 4 हजार, जुताई पर 5 हजार, खाद पर 5 हजार और मजदूरी पर 10 हजार रुपये खर्च किए। लेकिन किलों पर केवल 5 रुपये का दर मिल रहा है, जिससे यह फसल नुकसान में जा रही है।

- दिनेश देशमुख, किसान, मोरगांव

मजदूरी बचाने के लिए महिलाएं उतरीं खेत में

प्याज के दाम गिरने से बारामती तहसील के पश्चिमी क्षेत्र के किसानों पर भारी आर्थिक संकट आ गया है। उत्पादन लागत भी वहन न हो पाने के कारण किसानों को बाजार में प्याज बेचते समय नुकसान उठाना पड़ रहा है। नतीजतन, किसानों को मजदूरी पर खर्च करना भी महंगा पड़ रहा है और अब घर की महिलाएं ही खेतों में उतरकर प्याज निकालने का काम कर रहीं हैं।

प्याज उत्पादक हताश

  • किसान आज या कल अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद में पुरानी प्याज का स्टॉक खाली कर रहे हैं और नए सीजन की तैयारी शुरू कर दी है।
  • कुछ प्याज उत्पादक किसानों ने नुकसान से बचने के लिए तैयार फसल को वहीं छोड़ दिया है, जबकि कुछ ने रोटावेटर चलाकर फसल नष्ट कर दी और उस जगह पर अन्य फसलें उगाने का रास्ता अपनाया है। इस स्थिति से प्याज उत्पादक किसान पूरी तरह से हताश है।
  • फुलाबाई नेवसे और कांचन नेवसे ने बताया कि वे घर के काम के साथ-साथ खेती की जिम्मेदारी निभा रही है ताकि परिवार इस आर्थिक संकट से बाहर निकल सके, मजदूरी दर में वृद्धि, परिवहन खर्च और बाजार की अनिश्चितता के कारण खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।

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