प्रचार के दौरान रोहित पवार की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

Baramati By-election 2026: अजीत दादा की याद में भावुक हुए रोहित पवार, सुनेत्रा पवार के लिए मांगे 99% वोट

Baramati By-election: सुनेत्रा पवार के लिए रोहित पवार ने प्रचार शुरू किया, अजीत पवार के गांव काटेवाडी से शुरू हुए प्रचार में रोहित पवार ने परिवार और दादा की यादों को साझा किया।

गोरक्ष पोफली

Rohit Pawar Campaign: बारामती की राजनीति में एक युग के अंत के बाद अब नई सियासी इबारत लिखी जा रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) की ओर से सुनेत्रा पवार चुनावी मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके प्रचार की कमान अब उनके भतीजे और शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने संभाल ली है।

काटेवाडी से घोंगड़ी बैठक का आगाज़

अजीत पवार के पैतृक गांव काटेवाडी से रोहित पवार ने 'घोंगड़ी बैठकों' के माध्यम से प्रचार अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उनके साथ पिता राजेंद्र पवार और बहन सई पवार भी मौजूद थीं। यह बैठक केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक परिवार की भावनात्मक एकजुटता का प्रतीक नजर आई। रोहित पवार ने कहा, "आज हम यहाँ रोहित पवार बनकर नहीं, बल्कि अजीत दादा के भतीजे और उनके कार्यकर्ता के रूप में आए हैं।"

अजीत दादा के फैन थे रोहित पवार

प्रचार के दौरान रोहित पवार काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए बताया, "जब मैं छोटा था, तब मैंने अजीत दादा के लिए साइकिल रैली निकाली थी। उन्होंने ही मुझे जिला परिषद का टिकट दिया था। भले ही बाद में हम अलग-अलग पार्टियों में रहे, लेकिन मैं हमेशा दादा का फैन रहा। आज उनके फोटो को हाथ जोड़ते हुए मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हमारा नेता हमें इतनी जल्दी छोड़ जाएगा।"

निर्विरोध चुनाव की कोशिश और विपक्षी रणनीति

रोहित पवार ने बताया कि शरद पवार और अन्य नेताओं ने इस चुनाव को निर्विरोध कराने की पूरी कोशिश की थी। बड़े दलों ने कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया, लेकिन 22 निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में होने पर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने बारामती की जनता से अपील की, जो लोग बाहर से आए हैं, उन्हें एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए। सुनेत्रा काकी को 99% मतदान मिलना ही अजीत दादा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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पवार परिवार और भविष्य की एकजुटता

जब रोहित पवार से पूछा गया कि क्या वे और जय पवार (अजीत पवार के बेटे) एक साथ मंच पर दिखेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि समय कम होने के कारण सभी अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जा सके। उन्होंने कांग्रेस और अन्य सहयोगियों का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने शरद पवार के कहने पर अपनी उम्मीदवारी और मांगें पीछे ले लीं।

जनता के लिए यह बारामती उपचुनाव (Baramati By-election) केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि अजीत दादा की विरासत को आगे बढ़ाने की परीक्षा है। रोहित पवार का यह भावनात्मक अभियान सुनेत्रा पवार के लिए कितना मददगार साबित होता है, यह 23 तारीख को होने वाला मतदान तय करेगा।

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