Rohit Pawar Baramati Police Station News: NCP (SP) पार्टी के विधायक रोहित पवार दिवंगत नेता अजित पवार की विमान दुर्घटना मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए बारामती ग्रामीण पुलिस स्टेशन पहुंचे। जैसे ही रोहित पवार का काफिला थाने के करीब पहुंचा, वहां पहले से मौजूद हजारों समर्थकों ने 'अजित दादा अमर रहे' और 'अजित दादा के हत्यारों को फांसी दो' नारे लगा कर माहौल की सियासी गरमाहट को चरम पर पहुंचा दिया।
समर्थकों का आक्रोश इतना अधिक था कि पुलिस को थाने के मुख्य द्वार पर बैरिकेडिंग करनी पड़ी। रोहित पवार के साथ युगेंद्र पवार और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस हादसे के पीछे एक बड़ी साजिश है, जिसे दबाने के लिए सरकारी तंत्र और विमानन नियामक (DGCA) मिलकर काम कर रहे हैं।
बारामती पुलिस स्टेशन के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। समर्थकों की जिद थी कि जब तक पुलिस इस मामले में आधिकारिक तौर पर VSR Ventures और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करती, वे वहां से नहीं हटेंगे। 'अजित दादा अमर रहे' के नारों के बीच कई कार्यकर्ता भावुक नजर आए, जिनका मानना है कि बारामती के विकास के नायक को एक 'नियोजित दुर्घटना' में खो दिया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
रोहित पवार ने पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस करते हुए कहा कि उनके पास ऐसे पुख्ता सबूत हैं जो विमान के खराब रखरखाव और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 28 जनवरी को हुए हादसे के कुछ ही घंटों बाद डीजीसीए ने किस आधार पर 'क्लीन चिट' वाली रिपोर्ट जारी कर दी? रोहित पवार ने मांग की कि "अजित दादा की मौत की जांच केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह बारामती की जनता की भावनाओं का सवाल है। हम निष्पक्ष जांच और एफआईआर से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे।"
विधायकों और समर्थकों का मुख्य निशाना वह निजी विमान कंपनी (VSR Ventures) है, जिसका चार्टर्ड विमान क्रैश हुआ था। रोहित पवार ने दावा किया कि कंपनी के राजनीतिक रसूख के कारण जांच को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र का हवाला देते हुए कहा कि जब तक केंद्रीय उड्डयन मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं होगा। बारामती में हुए इस हंगामे ने राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ अब यह मुद्दा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि 'राजनीतिक साजिश' के रूप में देखा जा रहा है।