नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

नौसेना प्रमुख ने खोला ऑपरेशन सिंदूर की सफलता राज, बताया पाकिस्तानी बेड़े को बंदरगाहों में कैसे रोका

Pune News: नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता बताई, जिसने त्वरित तैनाती और आक्रामक युद्धाभ्यास से पाकिस्तानी नौसेना को उसके तटों तक सीमित कर दिया।

आकाश मसने

Indian Navy Chief Admiral Dinesh K Tripathi: नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने पुणे में आयोजित एक व्याख्यान में भारतीय नौसेना की निरंतर युद्ध की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय नौसेना की तत्परता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने क्रूर पहलगाम हमले के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी बेड़े को उसके बंदरगाहों के भीतर ही सीमित कर दिया था।

एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने हाल ही में भारतीय नौसेना की निरंतर युद्ध की तैयारी की आवश्यकता और क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह बात नौसेना फाउंडेशन पुणे चैप्टर द्वारा आयोजित ‘भू-राजनीति, प्रौद्योगिकी और रणनीति के निरंतर प्रवाह के बीच भारतीय नौसेना की गति’ विषय पर एडमिरल जेजी नाडकर्णी स्मारक व्याख्यान देते हुए कही।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहती है और अपनी युद्ध की तैयारी के लिए जानी जाती है, भले ही वे (युद्ध) बहुत कम हों। हालांकि, उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य पर जोर देते हुए कहा कि आज युद्ध बिना किसी पूर्व सूचना के हो रहे हैं। यह स्थिति और तैयारी के लिए निरंतर तत्परता का प्रतीक है।

तत्परता का उत्कृष्ट उदाहरण है ऑपरेशन सिंदूर

नौसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर को इस निरंतर तैयारी के संबंध में एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। ऑपरेशन सिंदूर सैन्य अभियान इस वर्ष अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद मई में शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि इस ऑपरेशन ने नौसेना की निरंतर तैयारी को प्रदर्शित किया। ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति के बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा कि इसमें हमारे जहाजों की त्वरित तैनाती, नृशंस पहलगाम हमले के 96 घंटों के भीतर कई हथियारों से गोलाबारी और आक्रामक युद्धाभ्यास शामिल थे। नौसेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी हिंद महासागर में ‘कैरियर बैटल ग्रुप’ (CBG) की उपस्थिति के दबाव ने यह सुनिश्चित किया कि पाकिस्तानी नौसेना अपने तट के करीब या अपने बंदरगाहों के भीतर बनी रहे।

नेवी प्रमुख ने बातया क्या है कैरियर बैटल ग्रुप

एडमिरल त्रिपाठी ने 'कैरियर बैटल ग्रुप' को एक नौसैनिक समूह के रूप में परिभाषित किया, जिसमें एक या एक से अधिक विमान वाहक के साथ-साथ विध्वंसक, फ्रिगेट और पनडुब्बियां जैसे अन्य युद्धपोत शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना द्वारा प्रदर्शित की गई इस तैयारी ने देश की अपने हितों की रक्षा करने की क्षमता के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर समुद्र से भी जबरदस्त ताकत उपलब्ध कराने की क्षमता का स्पष्ट संदेश दिया है।

बदलते खतरे और वैश्विक जिम्मेदारी

नौसेना प्रमुख ने बताया कि आज गैर-सरकारी तत्व और समूह भी हिंसा और गोलाबारी कर रहे हैं, जो पहले केवल राष्ट्रों से संबंधित थे। उन्होंने कहा कि गैर-पारंपरिक खतरे के दायरे में अब ऐसे हथियार, रणनीति और इरादे शामिल हैं जो राष्ट्र-स्तरीय संघर्षों को दर्शाते हैं। इस नई चुनौती के कारण यह जरूरी हो गया है कि समुद्र में जाने वाली हमारी सभी इकाइयां यथासंभव युद्ध के लिए तैयार रहें और साथ ही समुद्र में अन्य पुलिस और नौसैनिक भूमिकाओं के लिए भी तैयार रहें।

एडमिरल त्रिपाठी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौसेना की गतिविधियों को जारी रखने की बात भी कही। नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की रक्षा कर रही है और चालक दल की राष्ट्रीयता या पोत के झंडे के भेदभाव के बिना समुद्री डकैती से लेकर समुद्री आपात स्थितियों तक की घटनाओं पर प्रतिक्रिया दे रही है।

उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर दिया। नौसेना प्रमुख ने कहा कि जब वैश्विक समुद्र में उथल-पुथल मची होती है, तो दुनिया एक स्थिर प्रकाश स्तंभ की तलाश करती है। भारत यह भूमिका निभा सकता है और समुद्र में भारतीय नौसेना की गतिविधियां इस ज़िम्मेदारी को दर्शाती हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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