हादसे में लकवाग्रस्त हुए युवक को 1.06 करोड़ का मुआवजा देगी बीमा कंपनी (प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI) 
पालघर

पालघर MACT का बड़ा फैसला: 2017 हादसे में लकवाग्रस्त युवक को बीमा कंपनी देगी 1.06 करोड़ का मुआवजा

Palghar News: पालघर MACT ने 2017 के सड़क हादसे में 70% दिव्यांग हुए युवक ऋषभ चोपड़ा को 1.06 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश बीमा कंपनी और ट्रक मालिक को दिया है।

आकाश मसने

Palghar 1 Crore Compensation News: महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक बड़ा और महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सामने आया है। पालघर स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने साल 2017 में मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में लकवाग्रस्त हुए 31 वर्षीय युवक ऋषभ विजयकुमार चोपड़ा को 1.06 करोड़ रुपये का भारी मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के सदस्य ए. आर. रहाणे ने इस हादसे के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार ट्रक के मालिक और संबंधित बीमा कंपनी 'न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड' को संयुक्त रूप से यह मुआवजा राशि अदा करने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिका दायर करने की तारीख से 6 प्रतिशत प्रतिवर्ष के ब्याज दर के साथ पूरी राशि का भुगतान अगले दो महीनों के भीतर करना होगा।

2017 में नए साल की पूर्व संध्या पर हुआ था भीषण हादसा

अदालत में दायर दावा याचिका के अनुसार, होटल मैनेजमेंट के होनहार छात्र ऋषभ चोपड़ा 31 दिसंबर 2017 को अपने माता-पिता के साथ कार से गुजरात के वापी से मुंबई लौट रहे थे। जब उनकी कार पालघर के हलोली गांव के पास पहुंची, तभी बेहद तेज गति और लापरवाही से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भयानक थी कि कार सड़क पर तीन से चार बार पलटी खाते हुए दूसरी लेन में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में ऋषभ की मां की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि ऋषभ की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं और उनकी कमर से नीचे का पूरा हिस्सा पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गया।

बीमा कंपनी ने हादसे के लिए ऋषभ के पिता को बताया जिम्मेदार

अधिकरण के अनुसार, इस हादसे के कारण ऋषभ 70 प्रतिशत तक स्थायी रूप से अशक्त हो गए और तब से बिस्तर पर हैं। बीमा कंपनी ने मुआवजे के दावे का विरोध करते हुए हादसे के लिए ऋषभ के पिता की लापरवाही को जम्मेदार बताया। साथ ही भविष्य की आय तथा इलाज पर हुए खर्च को लेकर भी सवाल उठाए, लेकिन अधिकरण ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अधिकरण ने कहा कि पुलिस ने लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के आरोप में केवल ट्रक चालक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जो प्रथमदृष्टया ट्रक चालक की गलती को दर्शाता है।

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