नालासोपारा में SIR के बाद 50 हजार मतदाताओं के नाम गायब होने का दावा।
रोहित पवार ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
हितेंद्र ठाकुर और मनसे नेता अविनाश जाधव ने SIR प्रक्रिया का विरोध किया।
Nalasopara SIR Voter List Controversy: नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सियासी पारा हाई हो गया है। साल 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद शुरू हुई इस प्रक्रिया ने राज्य की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है।
एक तरफ जहां एनसीपी शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने 50 हजार मतदाताओं के अचानक गायब होने पर बड़ा सवाल खड़ा किया है, वहीं स्थानीय दिग्गज नेता हितेंद्र ठाकुर और मनसे नेता अविनाश जाधव ने भी इस पूरी प्रक्रिया पर तीखा विरोध जताया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार के विधायक रोहित पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे। उन्होंने कहा कि राज्य में सबसे ज्यादा मतदाताओं वाले नालासोपारा निर्वाचन क्षेत्र में 2024 के चुनाव से पहले कुल 6,08,526 मतदाता रजिस्टर्ड थे, जिसमें से 3,50,142 लोगों था। ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया
जब इन 50 हजार मतदाताओं ने 2024 के चुनाव में प्रत्यक्ष रूप से मतदान किया था, तो एसआईआर प्रक्रिया के बाद वे अचानक गायब कैसे हो गए? क्या ये सारे फर्जी मतदाता थे, जिन्हें बीजेपी ने जीत हासिल करने के लिए बाहर से मंगवाया था और उन्हीं के दम पर यहां चुनाव जीता गया?
वसई के कद्दावर नेता हितेंद्र ठाकुर ने भी इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अचानक खड़े हुए विवादों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने साफ शब्दों में पूछा है कि जब इस तरह से सब होना है, तो महाराष्ट्र सरकार चुनाव ही क्यों करवाती है? उनके इस कड़े तेवर से इलाके की राजनीतिक सरगर्मी और ज्यादा तेज हो गई है।
इस पूरे विवाद में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे भी पीछे नहीं है। मनसे नेता अविनाश जाधव ने भी वसई-विरार में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के नाम पर प्रशासनिक स्तर पर जो कुछ भी चल रहा है, उससे आम जनता और राजनीतिक दलों के मन में कई तरह की शंकाएं पैदा हो रही है, जिसका जवाब प्रशासन को देना ही होगा।
नालासोपारा अधिक मतदाताओं वाला विधानसभा क्षेत्र है। मतदान के आंकड़े 2024 के चुनाव में 6.08 लाख रजिस्टर मतदाताओं में से 3।50 लाख लोगों ने अपने मत का प्रयोग किया था।
एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदान करने वाले उन्हीं मतदाताओं में से 50 हजार नाम सूची से अचानक गायब होना बड़ा सवाल बन गया है। विपक्षी दलों ने सत्तापक्ष और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।