महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे (सोर्स: सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

Neelam Gorhe: हॉस्टल में बच्चों के साथ यौन शोषण मामले में नीलम गोर्हे ने लिखा पत्र, उपसभापति ने राज्य सरकार से की ये मांग

महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे ने ठाणे जिला स्थित खडवली के 'पसायदान' नामक संस्था में बच्चों के कथित यौन शोषण के मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए सरकार को पत्र लिखा है।

आकाश मसने

मुंबई: महाराष्ट्र के ठाणे जिला स्थित खडवली के 'पसायदान' नामक संस्था के नाम पर चल रहे हॉस्टल में बच्चों के साथ यौन शाेषण का मामला सामने आया है। टिटवाला पुलिस ने एक अनधिकृत छात्रावास में लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में संस्था का निदेशक भी शामिल है। जब आरोपियों को अदालत में पेश किया गया तो न्यायाधीश ने उन्हें अगले मंगलवार तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया।

महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे ने ठाणे जिला स्थित खडवली के 'पसायदान' नामक संस्था में बच्चों के कथित यौन शोषण के मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे को पत्र लिखा है। उन्होंने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

उपसभापति ने अपने पत्र में कहा है कि पीड़ित बच्चों का मानसिक और शारीरिक शोषण एक ऐसे संगठन की घोर लापरवाही के कारण हुआ, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होने का दावा करता है। इस मामले में संबंधित संगठन के कुछ पदाधिकारियों की संलिप्तता संदिग्ध पाई गई है और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सरकार ने ठोस कदम न हीं उठाए: उपसभापति

उपसभापति नीलम गोर्हे ने पत्र में खेद जताते हुए लिखा है कि पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं। उन घटनाओं पर बयान भी काफी दिए जा चुके हैं लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कलंबोली मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद भी राज्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होना गंभीर मामला है। उपसभापति गोर्हे ने अपने पत्र में मांग की है कि सरकार को कड़ा रुख अपनाना चाहिए और बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाली ऐसी घटनाओं पर रोक लगाकर एक उदाहरण स्थापित करना चाहिए।

उपसभापति ने ये मांगें रखी हैं

• दोषियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट, जेजे एक्ट और आईपीसी के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। • मामले में विशेषज्ञ वकीलों की नियुक्ति कर न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। • एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित की जानी चाहिए। • संगठन को चैरिटीज अधिनियम के अंतर्गत अपंजीकृत किया जाना चाहिए। • बाल पीड़ितों के लिए परामर्श और पुनर्वास की विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए। • पूरे राज्य में अवैध बाल छात्रावासों के खिलाफ अभियान चलाया जाना चाहिए। महाराष्ट्र की अन्य खबरें पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

क्या है मामला?

बता दें कि ठाणे जिले में एक संगठन द्वारा संचालित अनधिकृत छात्रावास में दुर्व्यवहार की शिकायत के बाद कम से कम 29 बच्चों को मुक्त कराया गया। जिला प्रशासन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि पुलिस ने शुक्रवार को खडावली में एक आवासीय संस्थान, जिसका नाम पसायदान विकास संस्था बताया गया है, से 20 लड़कियों और 9 लड़कों को मुक्त कराया और किशोर न्याय अधिनियम 2015 तथा यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण यानी पॉक्सो अधिनियम के तहत 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

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