21 अगस्त को जल संरक्षण दिवस फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
नासिक

पानी रोको-पानी बचाओ: सुधाकरराव नाईक की जयंती पर नासिक का संकल्प! जल संरक्षण दिवस पर विशेष रिपोर्ट

Nashik Water Conservation: 21 अगस्त को जल संरक्षण दिवस के अवसर पर नासिक जिले में जल संरक्षण अभियानों और उपलब्धियों पर विशेष रिपोर्ट। जलस्रोतों के पुनरुद्धार, गाद निकालने और सिंचाई सुविधाओं पर जोर है।

अंकिता पटेल

Nashik Water Conservation Projects: राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सुधाकरराव नाईक ने पानी रोको-पानी बचाओ का नारा देकर जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया था। उनकी जयंती 21 अगस्त को 'जल संरक्षण दिवस' के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर मृदा एवं जल संरक्षण विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में नासिक जिले में चलाए जा रहे जल संरक्षण अभियानों और उपलब्धियों पर आधारित यह विशेष रिपोर्ट है।

बारिश के पानी को रोकना, उसे जमीन में उतारना, उपलब्ध जल निकायों की क्षमता बढ़ाना और कृषि के लिए पानी की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना आज समय की मांग बन चुका है। बदलते पर्यावरण, जलवायु पर इसके विपरीत प्रभाव, वर्षा के बदलते पैटर्न और पानी की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए जल संरक्षण को केवल जल प्रबंधन तक सीमित न रखकर ग्रामीण विकास का एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

नासिक जिले में जल संरक्षण के कार्यों को गति देने के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से एकीकृत प्रयास किए जा रहे हैं। गाद मुक्त बांध-गाद युक्त खेत योजना, जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-जलागम विकास घटक 2.0 जैसी प्रमुख योजनाओं के जरिए नए जल निकायों का निर्माण, पुराने जल स्रोतों का पुनरुद्धार, गाद निकालना, नालों का गहराकरण, मृदा संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेष कोष और विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय से उपलब्ध धनराशि का अधिक प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया गया है।

जलयुक्त शिवार और जलागम विकास योजनाओं का विस्तार

जिले में विभिन्न एजेंसियों द्वारा पूर्ण किए गए कुल 1819 कार्यों को पोर्टल पर दर्ज किया जाना है। इनमें से 1313 कार्यों की वर्क आईडी बनाकर उन्हें जियो टैग कर दिया गया है। शेष कार्यों के लिए वर्क आईडी बनाने और जियो-टैगिंग की प्रक्रिया जारी है। डिजिटल माध्यम से कार्यों का रिकॉर्ड और वास्तविक स्थान की जानकारी उपलब्ध होने से प्रगति की निगरानी करना काफी आसान हो गया है।

जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 के अंतर्गत विशेष निधि से जिले के 231 गांवों में 1132 कार्यों को शामिल किया गया था। इनमें से 760 कार्य पूरे हो चुके हैं, जिन पर 4384.49 लाख रुपये खर्च किए गए है। जल संरक्षण के इन कार्यों को केवल एक विभाग तक सीमित न रखते हुए कृषि, वन, मृदा एवं जल संरक्षण, भूजल सर्वेक्षण एवं विकास, सामाजिक वनीकरण और मनरेगा जैसी एजेंसियों के माध्यम से लागू किया जा रहा है।

गाद हटाने के कार्यों से बढ़ी जलाशयों की क्षमता

इनमें 'गाद मुक्त बांध, गाद युक्त खेल' योजना जल संरक्षण और कृषि दोनों दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है, जलाशयों में वर्षों से जमा गाद को निकालने से जहां जल भंडारण क्षमता बढ़ती है, वहीं इस उपजाऊ गाद को खेतों में डालने से जमीन की उर्वरता में सुधार होता है। नासिक जिले में 15 जून तक जलाशयों से गाद निकालने के 110 कार्य प्रस्तावित थे।

इनमें से 86 कार्यों के माध्यम से कुल 14.33 लाख घनमीटर गाद निकाली जा चुकी है। इसके अलावा, नाला गहराकरण के 23 कार्यों से 6.53 लाख घनमीटर गाद हटाई गई है। इससे जलाशयों की जल संचयन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ कृषि योग्य भूमि की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। जल संरक्षण के कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए 'जलयुक्त शिवार अभियान 2।0' के तहत जियो-पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।

270 कार्य पूर्ण हो चुके

इनमें से 270 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 987.00 लाख रुपये व्यय किए गए हैं- जो कुल स्वीकृत राशि का लगभग 84।66 प्रतिशत है, शेष कार्यों को भी शीघ्र पूरा करने की योजना बनाई गई है। मृदा एवं जल संरक्षण के साथ-साथ उपलब्ध जल का किफायती और कुशल उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के उत्पादन प्रणाली घटक के माध्यम से किसानों को आधुनिक सिंचाई सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

किसानों को मिल रही राहत

विभागीय समन्वय के चलते उपलब्ध बजट का बेहतर उपयोग कर जल संरक्षण को व्यापक रूप दिया जा रहा है। संशोधित योजनाओं के जरिए विभिन्न विभागों के कार्यों में तालमेल बैठाकर जल संरक्षण का दायरा बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-जलागम विकास घटक 2.0 के तहत नासिक जिले के 20 गांवों को शामिल करते हुए 3 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

परियोजना संख्या 1 के बोढरी, चिराई, बहिराणे, वरचे टेंभे खालचे टेंभे, इजमाने, मळगाव भामेर, बिजोरसे, परियोजना संख्या 2 के जालखेड, कोकणगाव बु, श्रीरामनगर, ठेपणवाडी, वाघाड; तथा परियोजना संख्या 3 के वळवाडे, गारेगाव, वाळवाडी, खाकुडर्डी, निमशेवडी और मोरदर गांवों में जलागम विकास के कार्य किए जा रहे है। इस परियोजना की डीपीआर को 16 अक्टूबर 2023 को मंजूरी दी गई थी। इस योजना के तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन घटक के लिए 1165.80 लाख रुपये मंजूर हैं, जिसमें मृदा एवं जल संरक्षण, कृषि और वन विभाग के 297 कार्य शामिल है।

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