Nashik Student Death News (प्रतीकात्मक तस्वीर) 
नासिक

नाशिक न्यूज़: जन्मदिन बना मौत का दिन, बर्थडे के दिन हुआ लापता, 2 दिन बाद पेड़ से लटकी मिली लाश

Trimbakeshwar Ashram Shala Student Death: नाशिक के त्र्यंबकेश्वर में 10वीं के छात्र संजय नडगे का शव पेड़ से लटका मिला। वह अपने जन्मदिन पर आश्रम शाला से लापता हुआ था। पुलिस जांच जारी है।

अनिल सिंह

Nashik Student Death News: महाराष्ट्र के नाशिक जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ त्र्यंबकेश्वर तालुका के पिंपरी गाँव में 10वीं कक्षा के एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जिस दिन छात्र का 17वाँ जन्मदिन था, उसी दिन वह अपनी आश्रमशाला से लापता हो गया और दो दिन बाद उसका शव स्कूल से कुछ दूरी पर एक पहाड़ी इलाके में पेड़ से लटका हुआ पाया गया। मृतक की पहचान संजय सदू नडगे के रूप में हुई है। इस घटना ने न केवल छात्र के परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि आश्रमशालाओं में छात्रों की सुरक्षा और प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संजय, जो गुजरात सीमा से सटे बुरुडपाड़ा गाँव का रहने वाला था, एक गरीब मजदूर परिवार से ताल्लुक रखता था। उसके माता-पिता काम के सिलसिले में बाहर रहते थे, इसलिए संजय और उसके दो भाई इसी आश्रमशाला में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। 12 मार्च 2026, जो संजय का जन्मदिन था, वही दिन उसके जीवन का आखिरी दिन साबित हुआ।

जन्मदिन की दोपहर और रहस्यमयी गुमशुदगी

जानकारी के अनुसार, गुरुवार 12 मार्च को दोपहर करीब 3 बजे संजय बिना किसी को कुछ बताए पिंपरी स्थित माध्यमिक आश्रमशाला से बाहर निकल गया। जब वह शाम तक वापस नहीं लौटा, तो स्कूल प्रशासन ने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद जब वह नहीं मिला, तो प्रधानाध्यापक सुनील विट्ठल जाधव ने 13 मार्च को त्र्यंबकेश्वर पुलिस स्टेशन में उसके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। दो दिनों तक परिजन और पुलिस उसे ढूंढते रहे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।

पहाड़ी पर पेड़ से लटका मिला शव

रविवार 15 मार्च की दोपहर को आश्रमशाला से करीब दो किलोमीटर दूर एक पहाड़ी इलाके में कुछ बच्चे पशु चराने गए थे। वहां झाड़ियों के बीच एक पेड़ से संजय का शव लटका देख बच्चे डर गए और तुरंत इसकी सूचना गाँव वालों और प्रशासन को दी। त्र्यंबकेश्वर पुलिस स्टेशन के उप-निरीक्षक अशोक बोडके ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचकर शव को नीचे उतारा। पुलिस ने मौके का पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

आश्रमशाला प्रबंधन और सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और छात्र के परिजनों ने आश्रम शाला की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक नाबालिग छात्र स्कूल परिसर से बाहर कैसे चला गया और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या छात्रों के आने-जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था? स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्र अक्सर पढ़ाई के बहाने पीछे की पहाड़ी पर चले जाते थे, लेकिन शिक्षकों ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। इस लापरवाही ने एक होनहार छात्र की जान ले ली।

आत्महत्या या साजिश? पुलिस कर रही जांच

पुलिस फिलहाल इस मामले को 'एक्सीडेंटल डेथ' के तौर पर देख रही है, लेकिन हत्या की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि अपने जन्मदिन के दिन संजय इतना बड़ा कदम क्यों उठाएगा? क्या वह किसी मानसिक दबाव में था या स्कूल में उसके साथ कुछ गलत हुआ था? पुलिस संजय के सहपाठियों और शिक्षकों से पूछताछ कर रही है। संजय के माता-पिता ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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