Shirdi Sai Baba Temple LPG Crisis (फोटो क्रेडिट-X) 
नासिक

शिरडी में साईं के भक्तों पर पड़ेगी LPG संकट की मार, बिना प्रसाद के लौटेंगे लाखों भक्त!

Shirdi Sai Baba Temple LPG Crisis: शिरडी के साईं बाबा मंदिर में एलपीजी का स्टॉक केवल 10-15 दिनों का बचा है। गैस संकट के कारण 50 हजार भक्तों के लिए प्रसाद अब सौर ऊर्जा से बन रहा है।

अनिल सिंह

Shirdi Prasadalaya: महाराष्ट्र के शिरडी स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री साईं बाबा समाधि मंदिर पर भी गहराते एलपीजी (LPG) संकट का साया मंडराने लगा है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर बाधित हुई गैस आपूर्ति ने अब मंदिर के विशाल 'प्रसादालय' की व्यवस्थाओं को चुनौती दे दी है। मंदिर प्रबंधन ने जानकारी दी है कि वर्तमान में एलपीजी का स्टॉक केवल 10 से 15 दिनों के लिए ही बचा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो प्रतिदिन दर्शन के लिए आने वाले लाखों भक्तों को मिलने वाले 'महाप्रसाद' पर संकट आ सकता है।

शिरडी का साईं किचन देश के सबसे बड़े और आधुनिक भोजनालयों में से एक है, जहां रोजाना करीब 50 हजार भक्त भोजन ग्रहण करते हैं। हालांकि, मंदिर प्रशासन ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए एलपीजी के उपयोग में भारी कटौती की है और सौर ऊर्जा (Solar Energy) का अधिकतम इस्तेमाल शुरू कर दिया है, ताकि भक्तों को बिना प्रसाद के न लौटना पड़े।

सौर ऊर्जा बना सहारा, पर गैस की भी भारी जरूरत

मंदिर के असिस्टेंट इंजीनियर (मैकेनिकल) शरद शिरोले के अनुसार, मंदिर में चावल, दाल और भाप से पकने वाले अन्य व्यंजन पूरी तरह से सोलर सिस्टम के जरिए तैयार किए जा रहे हैं। इसके बावजूद, तड़का लगाने और रोटियां सेंकने के लिए एलपीजी स्टोव अनिवार्य है। संकट से पहले मंदिर में प्रतिदिन 1200 किलो गैस की खपत होती थी, जिसे अब घटाकर 700 किलो कर दिया गया है। शरद शिरोले ने बताया कि सौर ऊर्जा के कारण लगभग 200 किलो गैस की बचत हो रही है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से चिंता बनी हुई है।

प्रसाद के 'मेनू' में बदलाव की तैयारी

एलपीजी के सीमित स्टॉक को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने प्रसाद के मेनू में बदलाव करने का निर्णय लिया है। प्रशासन का प्लान है कि जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक भक्तों को 'सादा भोजन' परोसा जाएगा। ऐसी सब्जियों और व्यंजनों को फिलहाल नहीं बनाया जाएगा जिन्हें पकने में अधिक समय लगता है या जिनके लिए ज्यादा गैस की आवश्यकता होती है। मंदिर का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि मात्रा कम न हो, भले ही वैरायटी में थोड़ी कटौती करनी पड़े।

सोलर सिस्टम को अपग्रेड करने की योजना

शिरडी मंदिर का सोलर स्टीम सिस्टम वर्ष 2009 में लॉन्च किया गया था, जो उस समय दो टन खाना बनाने की क्षमता रखता था। वर्तमान गैस संकट ने भविष्य के लिए नई सीख दी है। मंदिर प्रबंधन अब अगले सात से आठ महीनों में इस सिस्टम को और अधिक अपग्रेड करने की योजना बना रहा है। इस अपग्रेडेशन के बाद, मंदिर के कुल भोजन का 70 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से सौर ऊर्जा और भाप के माध्यम से पकाया जा सकेगा, जिससे ईंधन के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता न्यूनतम हो जाएगी।

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