Nashik SIT Investigation: महाराष्ट्र सरकार को करीब 160 करोड़ रुपए का चूना लगाकर राज्य भर में हड़कंप मचाने वाले बहुचर्चित शालार्थ घोटाले में नासिक पुलिस आयुक्तालय के विशेष जांच दल ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। इस धांधली में शामिल करीब 1,200 संदिग्धों में से अब तक 8 मुख्य आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच, गिरफ्तार किए गए सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी शशिकांत हिंगोणेकर ने जमानत के लिए नासिकरोड अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर आज, मंगलवार 15 सितंबर को पहली सुनवाई होगी।
वहीं, राज्य शिक्षा बोर्ड के सेवानिवृत्त अध्यक्ष नितिन उपासनी की जमानत याचिका पर लंबित फैसले को लेकर पूरे शैक्षणिक जगत की निगाहें टिकी हुई हैं। नासिकरोड पुलिस स्टेशन में मार्च 2026 में दर्ज इस मामले की जांच अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके की टीम कर रही है। जांच में खुलासा हुआ है कि नासिक संभाग के 841 शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों की 'शालार्थ आईडी' फर्जी है।
इनमें से सर्वाधिक 638 कर्मचारी अकेले जलगांव जिले से हैं। मामले में अब तक नितिन उपासनी, किरण पाटिल, राहुल पवार, प्रशांत वाडीले, शशिकांत हिंगोणेकर, संजय गरुड़, दीपक गरुड़ और तुषार सालुंके को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में पाया गया है कि संदेहास्पद मध्यस्थ तुषार सालुंके ने तत्कालीन शिक्षा अधिकारियों को रिश्वत देकर अवैध रूप से व्यक्तिगत मान्यता हासिल की थी।
मामले के आरोपी शिक्षण संस्था संचालक एवं भाजपा पदाधिकारी संजय गरुड़ ने नासिकरोड अदालत में दायर अपनी जमानत याचिका वापस ले ली है। गिरफ्तारी के बाद चिकित्सीय कारणों से जिला अस्पताल में इलाज कराने के बाद गरुड़ फिलहाल नासिकरोड सेंट्रल जेल में बंद है। इस महाघोटाले की और अधिक गहन पूछताछ के लिए एसआईटी पुलिस गरुड़ को फिर से कस्टडी में लेने हेतु अदालत से गुहार लगाने की तैयारी में है।