आस्था का सैलाब (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया) 
नासिक

नासिक में 'परम एकादशी' पर उमड़ा आस्था का सैलाब; दुर्लभ शुभ संयोग में श्रद्धालुओं ने गोदावरी में लगाया डुबकी

Nashik Godavari River: नासिक में 'परम एकादशी' का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया। सर्वार्थसिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में श्रद्धालुओं ने गोदावरी नदी में स्नान कर मंदिरों में पूजा-अर्चना की।

रूपम सिंह

Nashik Parama Ekadashi Godavari River: धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी नासिक में 'परम एकादशी' का पावन पर्व बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर गोदावरी नदी के विभिन्न घाटों पर पवित्र स्नान करने और दान-पुण्य करने के लिए तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसके साथ ही, नासिक शहर और जिले के तमाम भगवान विष्णु, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विठ्ठल मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों की कतारें देखने को मिलीं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तीन साल के लंबे अंतराल के बाद इस बार परम एकादशी पर 'सर्वार्थसिद्धि योग' और 'शोभन योग' का एक अत्यंत दुर्लभ व शुभसंयोग बना। इस पर विशेष बात यह रही कि यह एकादशी गुरुवार को आई, जो दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए ही समर्पित माना जाता है।

सनातन में एकादशी का है उच्च स्थान

इस महासंयोग में की गई पूजा-अर्चना, व्रत और दान का फल कई गुना अधिक मिलने के कारण श्रद्धालुओं में इस दिन को लेकर खासा उत्साह देखा गया, पंचांग के अनुसार, सामान्यतः एक वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन इस वर्ष अधिक मास (मलमास) होने के कारण दो अतिरिक्त एकादशियां जुड़ गई हैं, जिससे इस वर्ष कुल 26 एकादशियों का विशेष व दुर्लभ योग बना है। अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी को 'परम एकादशी' कहा जाता है, जिसका सनातन धर्म में अत्यंत उच्च और पवित्र स्थान है।

मंदिर में किए गए थे पुख्ता इंतजाम

पंचांग के शुभ मुहूर्त (गोचर काल) को ध्यान में रखते हुए भक्तों ने सुबह से ही नियमों का पालन करते हुए व्रत और साधना का संकल्प लिया। परम एकादशी के इस महासंयोग को देखते हुए नासिक के इस्कॉन मंदिर और श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिरों सहित सभी प्रमुख विष्णु मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए, भगवान श्रीकृष्ण और विठ्ठल जी की मूर्तियों का पवित्र पंचामृत से विशेष अभिषेक किया गया।

इसके बाद भगवान को अलौकिक व आकर्षक वस्त्रों और आभूषणों से सजाया गया। मंदिरों के परिसरों में दिनभर अखंड हरिनाम संकीर्तन, सुमधुर भजन और 'परम एकादशी महात्म्य' की कथा का आयोजन चलता रहा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

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