तपोवन के करीब 17 हजार पेड़ों को बचाने के लिए मनपा ने विकल्प पर विचार किया।
उपलब्ध जमीन पर पेड़ काटे बिना साधुग्राम विकसित करने का प्रस्ताव।
मनपा आयुक्त मनीषा खत्री ने NGT को लिखित पत्र देने की जानकारी दी।
तपोवन में वृक्ष कटाई के विरोध में 16 नवंबर 2025 से आंदोलन जारी होने का दावा।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण में 9 दिसंबर को मामले की सुनवाई निर्धारित है।
Nashik Simhastha Kumbh Tapovan Tree Protection: नासिक में सिंहस्थ कुंभ के लिए तपोवन में प्रस्तावित साधुग्राम को लेकर मनपा ने पेड़ों की कटाई से बचने का विकल्प सामने रखा है। आयुक्त मनीषा खत्री के अनुसार, उपलब्ध जमीन पर साधुग्राम विकसित करने के प्रस्ताव को लेकर NGT को लिखित पत्र दिया जाएगा। मामले में 9 दिसंबर को सुनवाई निर्धारित है।
नासिक, सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए तपोवन में प्रस्तावित साधुग्राम के निर्माण को लेकर जारी विवाद के बीच नासिक महानगरपालिका ने पेड़ों की कटाई से बचने का विकल्प सामने रखा है। मनपा आयुक्त मनीषा खत्री के अनुसार, उपलब्ध जमीन का बेहतर नियोजन कर साधुग्राम विकसित करने के संबंध में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को लिखित पत्र दिया जाएगा।
इस पहल से तपोवन के करीब 17 हजार पेड़ों के संरक्षण की उम्मीद जगी है। साधुग्राम के लिए पेड़ काटने की योजना सामने आने के बाद से पर्यावरणप्रेमी और वृक्षमित्र इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुराने पेड़ों की कटाई से शहर के पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय जैव विविधता पर असर पड़ सकता है।
तपोवन में पेड़ों की कटाई का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक पहुंच चुका है। मामले में 9 दिसंबर को सुनवाई निर्धारित होने की जानकारी दी गई है। इसी बीच मनपा ने उपलब्ध जमीन का अधिकतम उपयोग कर साधुग्राम विकसित करने का विकल्प सामने रखा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मनपा अपने प्रस्ताव को किस रूप में NGT के सामने रखती है और साधुग्राम की रूपरेखा में क्या बदलाव किए जाते हैं। फिलहाल पेड़ों की कटाई रोकने या प्रस्तावित निर्माण में बदलाव को लेकर अंतिम निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सिंहस्थ कुंभ के दौरान देशभर से साधु-संतों और श्रद्धालुओं के नासिक पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन के सामने आवास, पेयजल, स्वच्छता, यातायात और आवागमन के मार्गों जैसी सुविधाएं विकसित करने की चुनौती है।
तपोवन में साधुग्राम के लिए जमीन का नियोजन करते समय इन सुविधाओं के साथ मौजूदा पेड़ों को सुरक्षित रखने के विकल्पों पर भी विचार करना होगा। मनपा के सामने ऐसी व्यवस्था तैयार करने की चुनौती है, जिससे कुंभ की जरूरतें पूरी हों और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सके।
तपोवन के पेड़ों को बचाने की मांग को लेकर पर्यावरणप्रेमी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुराने वृक्ष केवल हरियाली का हिस्सा नहीं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। नए पौधे लगाने से पुराने पेड़ों की पर्यावरणीय भूमिका की तत्काल भरपाई नहीं हो सकती।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तपोवन में वृक्ष कटाई के विरोध में 16 नवंबर 2025 से आंदोलन जारी है। मनपा ने सामाजिक संस्थाओं, वृक्षमित्रों, स्कूलों और पालकियों के माध्यम से शहर के विभिन्न हिस्सों में 50 हजार से अधिक पौधे लगाने की जानकारी भी दी है। हालांकि, पर्यावरणप्रेमियों की मुख्य मांग तपोवन के मौजूदा पेड़ों को सुरक्षित रखने की है।
अब सबकी नजर मनपा के अगले कदम और 9 दिसंबर को होने वाली NGT की सुनवाई पर टिकी है।