महंत मुरलीदास महाराज ने कुंभ तैयारियों की धीमी गति पर जताई नाराजगी।
साधु-संतों को अब तक साधुग्राम की जमीन नहीं सौंपे जाने पर सवाल।
कुंभ क्षेत्र में शराब और मांस-मछली की दुकानों पर कार्रवाई की मांग।
रामकुंड की खड़ी सीढ़ियों को श्रद्धालुओं के लिए जोखिमपूर्ण बताया।
किसानों को लंबित मुआवजा जल्द देने की मांग।
Nashik Simhastha Kumbh Murlidas Maharaj Objection: नासिक -त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों में देरी को लेकर संत-महंतों ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। महंत मुरलीदास महाराज ने साधुग्राम की जमीन का आवंटन लंबित रहने, रामकुंड की खड़ी सीढ़ियों से दुर्घटना की आशंका और कुंभ क्षेत्र में शराब, मांस-मछली की दुकानों के संचालन पर नाराजगी जताई। संतों ने किसानों को लंबित मुआवजा जल्द देने की मांग भी की।
नासिक ,आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों को लेकर संत-महंतों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। 31 अक्टूबर को नासिक और त्र्यंबकेश्वर में ध्वजारोहण के साथ कुंभपर्व की शुरुआत होनी है, लेकिन तैयारियों की गति और बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत संजयदास महाराज के बाद अब श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़े के महंत मुरलीदास महाराज ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। उन्होंने साधुग्राम की जमीन, रामकुंड की सीढ़ियों और कुंभ क्षेत्र में मांस-मछली की दुकानों के संचालन का मुद्दा उठाया।
गुरुवार को महंत मुरलीदास महाराज, महंत नरेंद्रदास, महंत हेमंतदास, महंत संजयदास और महंत भक्तिचरणदास महाराज ने रामकुंड और अमृत मार्ग क्षेत्र की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की धीमी गति पर असंतोष जताया।
महंतों का कहना है कि साधु-संतों को साधुग्राम की जमीन अब तक सौंप दी जानी चाहिए थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण और भूखंड आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। कुंभमेले के लिए तैयारियों का समय सीमित होने के कारण उन्होंने काम में तेजी लाने की मांग की।
महंत मुरलीदास महाराज ने कहा कि कुंभ क्षेत्र पवित्र धार्मिक आयोजन का केंद्र है। इसके बावजूद यहां शराब और मांस-मछली की दुकानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने इसे संत समाज के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए प्रशासन से ऐसी दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
महंतों ने यह भी कहा कि कुंभ क्षेत्र के किसानों को पहले का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। प्रशासन को लंबित भुगतान जल्द करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर संत-महंत किसानों के पक्ष में खड़े होंगे।
निरीक्षण के दौरान महंतों ने रामकुंड पर उतरने के लिए बनाई गई खड़ी सीढ़ियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इन सीढ़ियों से श्रद्धालुओं और साधु-संतों को परेशानी हो सकती है तथा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यहां सपाट सीढ़ियां बनाने की मांग की, ताकि बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आवाजाही में दिक्कत न हो।