Nashik Municipal Corporation: जिस लाडले बप्पा को सभी 'विघ्नहर्ता' के रूप में पूजते हैं, उसी गणराय के आगमन की तैयारियों के बीच नासिक के 3 परिवारों पर एक साथ दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शहर में एक ओर गणेशोत्सव का उत्साह चरम पर था, वहीं दूसरी ओर बदहाल सड़कें, गड्ढे, अव्यवस्थित विकास कार्य और लापरवाह यातायात ने तीन युवकों की जान ले ली। महज 24 घंटे में 30 से 42 वर्ष की आयु के तीन कमाऊ सदस्यों की मौत से शहर में शोक की लहर है।
दिंडोरी रोड पर बजाज शोरूम के सामने एसटी बस की चपेट में आने से सिडको के पवननगर निवासी संतोष शिवाजी गांगुर्डे (30) की मौत हो गई। संतोष बाइक से नासिक से दिंडोरी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान वे एसटी बस की चपेट में आ गए। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। गणेशोत्सव के ठीक पहले 30 वर्षीय बेटे की मौत से गांगुर्डे परिवार का सहारा छिन गया है।
दूसरी घटना दिंडोरी रोड पर तारवाला नगर सिग्नल के पास महावीर होटल के सामने हुई। अज्ञात वाहन की टक्कर में मखमलाबाद निवासी कैलास शंकर रोकडे (42) गंभीर रूप से घायल हो गए। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उपचार से पहले ही उनकी मौत हो गई।
तिसरी घटना गंगापुर रोड स्थित सिद्धार्थनगर में पाइपलाइन कार्य के लिए सड़क पर आड़े रखे काले लोहे के पाइप से टकराने के कारण सिद्धार्थ दत्तात्रय गोरे (33, निवासी अंबड) की भी दर्दनाक मौत हो गई। अंधेरे और सड़क पर रखे पाइपों के कारण हादसा होने का आरोप है। बताया जा रहा है कि सडक पर गड्ढों के कारण हर दो से तीन दिन में एक मौत हो रही है और यह सिलसिला बढता जा रहा है।
गणेशोत्सव की पूर्व संध्या पर शहर में हादसों का तांडव देखने को मिला। 12 सितंबर की रात करीब पौने 11 बजे से 13 सितंबर की रात पौने 9 बजे तक, यानी करीब 22 से 24 घंटे के भीतर तीन अलग-अलग स्थानों पर भीषण हादसे हुए। तीन परिवारों के कमाऊ सदस्यों की मौत से नागरिकों में चिंता और आक्रोश है। गणराय के स्वागत की खुशियों के बीच तीन परिवारों के घर मातम छा गया है। सड़कों की बदहाली, गड्ढों और विकास कार्यों में लापरवाही को लेकर मनपा प्रशासन और ठेकेदारों के खिलाफ नागरिकों में तीव्र नाराजगी व्यक्त की जा रही है।
त्यौहारों के बीच 3 नागरिकों की दुखद मौत ने मनपा प्रशासन और ठेकेदारों की लापरवाही की पोल खोल कर रख दी है। गणेशोत्सव के उल्लास के बीच तीन परिवारों का तबाह होना बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक है। सड़कों की खस्ताहाली और हर कदम पर मौजूद जानलेवा गड्ढे यह स्पष्ट करते हैं कि नगर निगम प्रशासन जनता की सुरक्षा को लेकर रत्ती भर भी गंभीर नहीं है। मानसूनी बारिश के बाद गड्ढों को भरने के नाम पर केवल खानापूर्ति और लीपापोती की गई, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
भ्रष्टाचार और लापरवाही: ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री का निर्माण कार्यों में उपयोग करना और मनपा अधिकारियों का उन पर कोई नियंत्रण न होना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। सड़कों पर सन्नाटा, फाइलों में काम: कागजों पर लाखों रुपए की मरम्मत का दावा किया जाता है, जबकि जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन को यह समझना होगा कि गड्ढों की मरम्मत में देरी केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ है। जब तक दोषी ठेकेदारों पर आपराधिक मामले दर्ज नहीं होंगे और जवाबदेह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक यह आक्रोश शांत नहीं होगा।