प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
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नासिक मनपा चुनाव: निष्ठावानों को झटका, ‘आयारामों’ को टिकट, 23 बाहरी चेहरों को उम्मीदवारी

Nashik Ayaram Gayaram: मनपा चुनाव में टिकट वितरण से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। भाजपा ने सर्वे और काबिलियत के नाम पर कई पुराने नेताओं को दरकिनार कर बाहरी चेहरों को तरजीह दी है।

अंकिता पटेल

Nashik Municipal Election Hindi News: नासिक पिछले कई सालों से महानगरपालिका चुनाव का इंतजार कर रहे निष्ठावान कार्यकर्ताओं के अरमानों पर इस बार पानी फिर गया है।

भाजपा सहित अन्य प्रमुख दलों ने अपनी 'काबिलियत' और 'चुनावी सर्वे' के नाम पर अपनी ही पार्टी के पुराने पार्षदों और वफादारों को दरकिनार कर दिया है।

हैरानी की बात यह है कि उन लोगों को प्राथमिकता दी गई जो चुनाव से ठीक पहले अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर आए थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता अपनी जिद पर अड़े रहे और लगभग 23 बाहरी लोगों (आयाराम) को उम्मीदवारी थमा दी।

भाजपाः 'आए और टिकट ले गए'

भाजपा ने दूसरी पार्टियों के पुराने पार्षदों के साथ-साथ ऐन वक्त पर आए कार्यकर्ताओं को मौका दिया है। इस सूची में खंडू बोडके, नीलम नरेश पाटिल, गुरमीत सिंह बग्गा, मनीष बागुल, प्रशांत दिवे, उषा बॅडकोली, दिनकर पाटिल, अमोल पाटिल, मानसी शेवरे, राजेंद्र महाले, सुधाकर बडगुजर, दीपक बडगुजर, कल्पना चुंभले, कैलास चुंभले, योगिता हीरे, अदिति पांडे, हितेश वाघ, राहुल शेलार, शाहू खैरे, सचिन मराठे, डॉ। सीमा ताजने और शाम गोहाड जैसे नाम शामिल हैं।

निष्ठावानों का अपमानः एक टिकट के लिए तरसे

भाजपा में तीस-चालीस साल से काम करने वाले कार्यकर्ता एक अदद टिकट के लिए संघर्ष करते रहे, लेकिन पार्टी ने 'परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए तीन परिवारों में दो-दो टिकट बांट दिए।

सुधाकर बडगुजर और उनके बेटे दीपक बडगुजर को उम्मीदवार बनाया गया है। कल्पना चुभले और उनके साले कैलाश चुभले को भी टिकट मिला है। दिनकर पाटिल और उनके बेटे अमोल पाटिल को भी पार्टी ने मैदान में उतारा है।

इससे उन कार्यकर्ताओं में भारी खलबली है जो सालों से पार्टी का झंडा ढो रहे है। नासिक मनपा की 122 सीटों के लिए इस बार रिकॉर्ड 2,357 दावेदार सामने आए हैं। भाजपा ने सबसे अधिक 118 उम्मीदवार मैदान में उतारे है।

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