Nashik Farmers Loan Waiver Confusion: नासिक विधानसभा चुनाव के दौरान महायुति ने सत्ता में आने पर कर्जमाफी का वादा किया था। अब बजट में इसकी घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन स्पष्टता के अभाव में किसान असमंजस में हैं। नासिक जिले के किसानों में इस बात को लेकर नाराजगी और भ्रम है कि यह लाभ वास्तव में किसे मिलेगा और किसे नहीं।
सरकार की घोषणा के अनुसार, 30 सितंबर 2025 तक जिन किसानों का फसली कर्ज बकाया है, उन्हें 2 लाख रुपये तक की माफी मिलेगी, लेकिन इसमें कई पेंच हैं , सीमा का बंधनः यदि कर्ज 2 लाख रुपये से एक रुपया भी ज्यादा है, तो किसान को पहले अतिरिक्त राशि बैंक में जमा करनी होगी, तभी वह योजना के लिए पात्र होगा।
नियमित कर्ज चुकाने वालों को 50 हजार रुपये देने की बात कही गई है, लेकिन यदि किसी का कर्ज ही 30-40 हजार है, तो उसे पूरी राशि नहीं मिलेगी।
कई किसानों के पास फसली कर्ज के अलावा मध्यम और दीर्घकालिक कर्ज भी हैं। यदि उनका फसली कर्ज नियमित है लेकिन दूसरा कर्ज बकाया है, तो उन्हें 'नियमित कर्जदार' नहीं माना जाएगा, जिससे वे लाभ से वंचित रह सकते हैं। सरकारी कर्मचारी, आयकर भरने वाले और बड़े किसानों को इस योजना से बाहर रखा गया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नांदगांव तालुकाध्यक्ष महेंद्र बोरसे ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं, उन्होंने पूछा है कि क्या सरकार हमेशा की तरह जटिल शर्ते बोपकर किसानों को इस लाभ से वंचित रखना चाहती है? जब तक विस्तृत दिशानिर्देश जारी नहीं होते, तब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि वास्तव में कितने किसान पात्र होंगे।
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कर्जमाफी सीमाः 2,000,000 (दो लाख रुपये) तक।
कट-ऑफ डेटः 30 सितंबर 2025 तक का बकाया कर्ज।
नियमित कर्जदारों के लिएः 50,000 का प्रोत्साहन अनुदान।
अपात्र श्रेणीः सरकारी कर्मचारी, आयकर दाता और बड़े जमींदार।
सरकार ने कर्जमाफी की घोषणा तो कर दी, लेकिन इसके पीछे की शर्ते किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है, पीक कर्ज के अलावा अन्य कर्ज लेने बाले किसानों का क्या होगा?
सरकार को तुरंत स्पष्ट मापदंड घोषित करने चाहिए ताकि बलीराजा को भटकना न पड़े।
- एनसीपी, तालुकाध्यक्ष, महेंद्र बोरसे