Nashik MHADA Land Reservation Issue: नासिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) को म्हाडा के माध्यम से मिलने वाले किफायती घरों से वंचित रखने के लिए किए गए बड़े भूमि घोटाले में राजस्व विभाग ने सख्त कदम उठाया है।
विभाग ने 49 विकासकों द्वारा तैयार किए गए सभी विवादित और विभाजित ले-आउट को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस मामले में कुल 438 लोगों को नोटिस थमाया गया है।
नियम के अनुसार, यदि कोई भूखंड एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल का है, तो उसका 20 प्रतिशत हिस्सा गरीबों के घरों के लिए म्हाडा को देना अनिवार्य है। हालांकि, इस नियम से बचने के लिए बिल्डरों ने एक सोची-समझी साजिश रची।
एक एकड़ से अधिक की जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया ताकि कोई भी हिस्सा एक एकड़ की सीमा तक न पहुंचे और म्हाडा को जमीन न देनी पड़े, जांच में सामने आया है कि इस खेल में भूमि अभिलेख विभाग के फर्जी नक्शे, जाली मुहरें और झूठे हस्ताक्षरों का सहारा लिया गया।
आठ दिन पहले शासन द्वारा नियुक्त जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर 49 बिल्डरों और जमीन मालिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब उप-विभागीय कार्यालय के नायब तहसीलदार जितेंद्र धनराले ने आदेश जारी किया है कि संबंधित जमीन मालिक और विकासक 27 मार्च को दोपहर 3 बजे सुनवाई के लिए उपस्थित रहें। सुनवाई के दौरान उन्हें जमीन की पैमाइश और ले-आउट से संबंधित सभी वैध दस्तावेज और मूल सबूत पेश करने होंगे।
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राजस्व विभाग और म्हाडा द्वारा शुरू की गई इस समानांतर कार्रवाई के कारण नासिक के बिल्डर लॉबी और भू-माफिया में हड़कंप मच गया है। पुलिस जहां धोखाधड़ी के आपराधिक पहलुओं की जांच कर रही है, वहीं राजस्व विभाग ने इन विवादित जमीनों से जुड़े सभी 438 लोगों को नोटिस भेजकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यदि विकासक वैच सबूत पेश नहीं कर पाते, तो उनके सभी ले-आउट रद्द कर दिए जाएंगे।