Nashik Traffic Jam Dwarka Chowk: नासिक शहर में द्वारका चौक से नासिकरोड तक प्रस्तावित 10 लेन सड़क परियोजना को सिंहस्थ कुंभमेले से पहले पूरा करने के उद्देश्य से नासिक मनपा ने तीसरी बार निविदा जारी की है। इस परियोजना की लागत करों को छोड़कर 177 करोड़ 74 लाख रुपये निर्धारित की गई है। परियोजना के तहत नासर्डी नदी पर स्थित पुल के चौड़ीकरण का ही एकमात्र कार्य शामिल किया गया है।
द्वारका चौक से दत्त मंदिर चौक तक 6.4 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को 10 लेन में परिवर्तित करने के बावजूद प्रमुख चौराहों पर पुलों का निर्माण नहीं होने से ट्रैफिक जाम की समस्या यथावत रहने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस परियोजना से वास्तविक लाभ क्या होगा। विशेष बात यह है कि इसी मार्ग का करीब एक वर्ष पहले ही 19.42 करोड़ रुपये खर्च कर 6 लेन डामरीकरण किया गया था और सड़क की स्थिति फिलहाल अच्छी मानी जा रही है।
इसके बावजूद अब अतिरिक्त चार लेन के निर्माण पर 177 करोड़ रुपये खर्च किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित होने के कारण सिंहस्थ से पहले अतिरिक्त चार लेन का निर्माण पूरा होना मुश्किल माना जा रहा है। सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए नासिक शहर की प्रमुख सड़कों के विकास कार्यों के लिए निविदाएं जारी की जा चुकी है और कुछ परियोजनाओं पर काम भी शुरू हो गया है।
द्वारका से नासिकरोड सड़क परियोजना के लिए केंद्र सरकार के सड़क विकास मंत्रालय से निधि प्राप्त करने के प्रयास लंबे समय से जारी थे। अंततः फरवरी में केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी, जिसके बाद मार्च में 6.435 किलोमीटर लंबे और 45 मीटर चौड़े 10 लेन मार्ग के लिए निविदा जारी की गई। पहली 2 निविदाओं को अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिलने के बाद अब तीसरी निविदा जारी की गई है। इसके अनुसार वर्तमान 22 मीटर चौड़ी सड़क के साथ अतिरिक्त 23 मीटर सड़क का निर्माण 12 महीने के भीतर पूरा करना प्रस्तावित है।
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परियोजना में केवल नासर्डी नदी पर पुल चौड़ीकरण को शामिल किया गया है। कुंभ मेले से संबंधित एक बैठक में विधायक देवयानी फरांदे ने इस सड़क पर प्रमुख चौराहों पर फ्लाईओवर नहीं होने से भविष्य में भारी ट्रैफिक जाम की आशंका जताई थी। इस पर मुख्यमंत्री ने महानगरपालिका आयुक्त मनीषा खत्री से जानकारी ली, तो उन्होंने बताया कि केंद्रीय सड़क विकास मंत्रालय ने प्रस्तावित पुलों को मंजूरी नहीं दी है।
इसके बाद विधायक फरांदे ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस मार्ग पर पुलों की आवश्यकता की ओर आकर्षित किया। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि यदि केंद्र सरकार निधि उपलब्ध नहीं कराती, तो राज्य स्तर पर आवश्यक कार्य किए जाएं। इससे संकेत मिला था कि जरूरत पड़ने पर प्रमुख चौराहों पर पुल बनाए जा सकते हैं। हालांकि बाद में जारी निविदा में इन पुलों को शामिल नहीं किया गया।