नासिक के शहर पक्षी मानचिह्न के लिए कौआ और गिद्ध दो विकल्प।
ऑनलाइन मतदान के जरिए नागरिकों की राय लेने की तैयारी।
आपलं पर्यावरण संस्था के शेखर गायकवाड ने महापौर हिमगौरी आडके-आहेर से की मुलाकात।
पक्षी प्रेमियों ने चयन प्रक्रिया में विशेषज्ञों की भागीदारी की मांग उठाई।
शहर की जैव विविधता को ध्यान में रखकर व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाने पर जोर।
Nashik Bird Conservation Biodiversity Online Voting: नासिक शहर का पक्षी मानचिह्न तय करने के लिए कौआ और गिद्ध में से एक को चुनने की पहल की जा रही है। जल्द ऑनलाइन मतदान शुरू करने की योजना है। हालांकि, केवल दो विकल्प रखने और पक्षी विशेषज्ञों व पर्यावरणविदों को चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं करने पर सवाल उठ रहे हैं।
नासिक शहर का पक्षी मानचिह्न तय करने की पहल शुरू हो गई है। इसके तहत कौआ और गिद्ध में से किसी एक पक्षी को शहर का प्रतिनिधि पक्षी चुनने की संकल्पना सामने आई है। इसके लिए जल्द ही ऑनलाइन मतदान शुरू करने की योजना है।
इस पहल को लेकर आपलं पर्यावरण संस्था के शेखर गायकवाड ने महापौर हिमगौरी आडके-आहेर से मुलाकात कर चर्चा की। हालांकि, चयन के लिए केवल दो पक्षियों को विकल्प के रूप में रखने पर पक्षी प्रेमियों, विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के बीच सवाल उठ रहे हैं।
प्रस्तावित पहल का उद्देश्य कौआ और गिद्ध के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व से नागरिकों को परिचित कराना है। योजना के अनुसार, दोनों पक्षियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद नागरिक ऑनलाइन मतदान के जरिए अपनी पसंद के पक्षी का चयन कर सकेंगे।
महापौर ने नासिक के विद्यालयों और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों सहित सभी नागरिकों से इस पहल में उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपील की है। साथ ही पक्षी संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया है।
नासिक शहर पक्षी चुनने की पहल का स्वागत किया जा रहा है, लेकिन चयन प्रक्रिया में स्थानीय पक्षी प्रेमियों, विशेषज्ञों, प्रकृति प्रेमी संस्थाओं और पर्यावरणविदों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पक्षी प्रेमियों का कहना है कि शहर की जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले पक्षी का चयन व्यापक विचार-विमर्श के बाद किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, विकल्पों को केवल कौआ और गिद्ध तक सीमित रखने के बजाय नासिक और आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाले अन्य पक्षियों की विविधता, उनकी पारिस्थितिक भूमिका और स्थानीय अध्ययनों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
पक्षी विशेषज्ञों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का मानना है कि चयन प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी से शहर के पक्षियों और उनके संरक्षण को लेकर नागरिकों की समझ बढ़ सकती है। स्थानीय पक्षियों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी और विशेषज्ञों की राय शामिल करने से चयन अधिक समावेशी और तथ्यपरक बन सकता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऑनलाइन मतदान की प्रक्रिया कब शुरू होती है और क्या चयन से पहले अन्य पक्षियों पर भी विचार किया जाता है।