नासिक गिरीश महाजन (सोर्सः सोशल मीडिया)
नासिक

जमीन पर बैठकर पालकमंत्री ने आंगनवाड़ी सेविकाओं से किया संवाद, विभिन्न मांगों पर दी सकारात्मक प्रतिक्रिया

Girish Mahajan In Nashik:नासिक में पालकमंत्री गिरीश महाजन ने आंगनवाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं और मुख्य शिक्षिकाओं के साथ जमीन पर बैठकर संवाद किया। कर्मचारियों ने विभिन्न मांगें रखीं।

आंचल लोखंडे

Nashik Anganwadi Workers: नासिक महानगरपालिका मुख्यालय की हरी घास पर पालकमंत्री गिरीश महाजन सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने आंगनवाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं तथा मुख्य शिक्षिकाओं के साथ जमीन पर बैठकर संवाद किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न समस्याएं और मांगें सीधे पालकमंत्री तथा जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखीं। विशेष रूप से आंगनवाड़ी सेविकाओं ने हर वर्ष तीन हजार रुपये वेतनवृद्धि देने की मांग की।

इस अवसर पर महापौर हिमगौरी आहेर-आडके, विधायक देवयानी फरांदे, उपमहापौर विलास शिंदे, मनपा आयुक्त मनीषा खत्री तथा नगरसेवक दिनकर पाटील उपस्थित थे। आंगनवाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं और मुख्य शिक्षिकाओं ने नियमित वेतन, सेवानिवृत्ति वेतन, ड्रेसकोड सहित विभिन्न मांगें रखीं।

मानधन में हर वर्ष तीन हजार रुपए की वृद्धि की मांग

आंगनवाड़ी सेविकाओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए उनके मानधन में हर वर्ष तीन हजार रुपये की वृद्धि की जानी चाहिए। इसके अलावा नियमित रूप से मानधन मिलने, सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा तथा ड्रेसकोड उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। शिक्षिकाओं ने भी वेतनवृद्धि के साथ ड्रेसकोड और धूप से बचाव के लिए सनकोट उपलब्ध कराने की मांग रखी। इन मांगों को लेकर महापौर हिमगौरी आहेर-आडके और मनपा नगरसेवकों की ओर से मानधन वृद्धि के संबंध में प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। वहीं विधायक देवयानी फरांदे ने इस विषय में शासन के महिला एवं बाल कल्याण विभाग के स्तर पर लगातार प्रयास किए हैं।

मांगों पर निर्णय का आश्वासन

इस दौरान पालकमंत्री गिरीश महाजन तथा उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को ध्यानपूर्वक सुना। कुछ मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए संबंधित स्तर पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया। कर्मचारियों ने भी उम्मीद जताई कि लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द ही ठोस निर्णय होगा।

पद का औपचारिकता छोड़ जमीन पर संवाद

इस संवाद की विशेषता यह रही कि पालकमंत्री गिरीश महाजन सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पद की औपचारिकता को किनारे रखते हुए कर्मचारियों के साथ जमीन पर बैठकर बातचीत की। इससे प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संवाद अधिक सहज और खुला रहा। कर्मचारियों की समस्याएं सीधे सुनकर उनके समाधान की दिशा में तत्काल पहल करने के लिहाज से यह संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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